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युवाओं की धरपकड़ के विरोध में फिर एसआईटी चीफ से मिलने पहुंचे ग्रामीण..

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। एक तरफ पुलिस प्रशासन पर मुख्य आरोपी सहित दो की गिरफ्तारी का दबाव वहीं पुलिस की धरपकड़ के बीच ग्रामीणों का विरोध भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने 17 सितंबर को नाहड़ रेस्ट हाउस में पहुंचकर हिरासत में लिए गए गांव के युवाओं को लेकर रोष जताया था। इसके बाद पुलिस की तरफ से लगभग 18 युवकों को छोड़ दिया गया था लेकिन कुछ युवकों को नहीं छोड़ा था। इसके बाद ग्रामीण वीरवार को फिर नाहड़ पुलिस चौकी पहुंचे और पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाते हुए बेकसूरों को छोड़ने की मांग की।
एसआईटी चीफ से मिलने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि इस घटना के बाद उनके गांव से युवकों की बड़ी संख्या में धरकपड़ की जा रही है। घटना के अगले दिन गांव के काफी युवकों को उठा लिया गया था लेकिन जब 17 सितंबर को उन्होंने इस बात को लेकर विरोध जताया तो उसके बाद ही युवकों को छोड़ा गया था। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद फिर दोबारा से सीआईए और एसआईटी की ओर से छापामार कार्रवाई की जा रही है जिसकी वजह से गांव के लोगों में भय बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इसकी वजह से गांव के कई युवा तो अपने घरों में भी नहीं आ रहे हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस द्वारा न केवल बच्चों से पूछताछ की जा रही है अपितु उनसे आरोपियों के बारे में पूछताछ के नाम पर मारपीट करके प्रताड़ित किया जा रहा है। पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। महिलाओं ने कहा कि पूरे गांव में हालात यह है कि पुरुष घरों पर रुकना ही नहीं चाहते हैं क्योंकि पुलिस द्वारा लगातार छापे मारे जा रहे हैं।
पिता को पुलिस ले गई, दिव्यांग बेटी का रो-रोकर बुरा हाल
ग्रामीण अपने साथ एक महिला और उसकी दिव्यांग बच्ची को लेकर भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि बच्ची के पिता को पिछले कई दिनों से पुलिस ने बिठाया हुआ है जिसकी वजह से बच्ची उससे मिलने की जिद कर रही है। हिरासत में लिए गए युवक के परिजनों ने बताया कि बच्ची का रो-रोकर बुरा हाल है और वह अपने पिता से मिलने की जिद पर अड़ी हुई है।
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धरपकड़ के डर से भूमिगत हुए लोग, बाजरे की कटाई प्रभावित
ग्रामीणों ने बताया कि इस घटनाक्रम के बाद पुलिस द्वारा की जा रही धरपकड़ की वजह से गांव के काफी लोग भूमिगत है। इसकी वजह से उनकी अब पककर तैयार बाजरा की फसल को भी काटने के लिए परिवार में लोग नहीं है। उन्होंने बताया कि अब बाजरे की कटाई का समय है लेकिन उनको थाना-चौकियों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने दोहराया कि पुलिस को हम इस बात के लिए पहले ही कह चुके हैं कि जो निर्दोष बच्चे हैं उनको अविलंब छोड़ा जाए। इसके बाद एसआईटी चीफ ने कहा कि किसी भी युवक से मारपीट नहीं की जा रही है और जांच के बाद जो निर्दोष हैं उनको छोड़ दिया जाएगा।
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