हत्या कर शव ठिकाने लगाने के लिए जिले की सीमा से होकर गुजर रहा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ बड़ा अड्डा बनता जा रहा है। एक साल में विभिन्न थानों की पुलिस ने करीब 13 से ज्यादा शव बरामद किए लेकिन तमाम केसों में हत्या की गुत्थी सुलझाना पहेली बनी है। शव की पहचान न होने की वजह से ज्यादातर मामलों की जांच ठंडे बस्ते में चली जाती है।
हाल ही में बावल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव खेड़ा मुरार के समीप बदमाशों ने एक महिला की हत्या कर शव को खेतों में फेंक दिया था। शव को देखकर आशंका लगाई जा रही थी कि दुष्कर्म के बाद महिला की हत्या की गई थी। क्षेत्र में यह मामला काफी चर्चा में रहा था। कई बार तो शवों की पहचान के बाद शव के फेंके जाने की बात का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, शव मिलने पर पुलिस उसे कब्जे में लेकर पहचान के लिए आसपास के लोगों को बुलाती है। 72 घंटे तक शनाख्त के लिए कोई सामने नहीं आता तो पोस्टमार्टम के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए सेवा समिति को सौंप दिया जाता है।
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पहचान नहीं तो बस फाइलों में रहता है केस
अधिकतर मामलों में तो पुलिस शव की शिनाख्त करवाकर केस को सॉल्व कर लेती है, लेकिन कई मामले ऐसे भी होते हैं जो फाइलों में दबकर रह जाते हैं। शव की पहचान न होने से पुलिस मर्डर की मिस्ट्री नहीं सुलझा पाती। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस शव से मिले सामान और कपड़े अपने पास रख लेती है। इसके बाद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की फाइल बंद कर दी जाती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार ऐसे मामलों में कुछ जगह मृतक की फोटो और पोस्टर लगाकर भी कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। लेकिन मामले की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।
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केस वन
छह माह पूर्व हाईवे पर ओढ़ी गांव के कट के समीप एक नाले में पड़े एक सूटकेश में एक युवती का शव मिला था। शव मिलने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। महिला की पहचान नहीं हो पाई। महिला की हत्या कर शव को फेंके जाने की आशंका जताई गई थी। मृतका के शरीर पर लाल रंग की सलवार-सूट मिली थी। मृतका की उम्र करीब 30-35 साल थी।
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केस दो
हाईवे पर मसानी बैराज में 24 मई 2015 को ण्क युवक का शव पेड़ से लटका मिला था। मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। ऐसी आशंका जताई गई थी कि हत्या कर शव को फेंका गया होगा। पुलिस टीम के साथ एफ एस एल टीम ने जांच पड़ताल की।
-इसके अलावा 4 जून 2015 को निखरी कट के समीप एक युवक का शव मिला था।
-27 मई 2015 को मालपुरा के समीप एक नाबालिग का शव मिला
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वर्जन
जो भी डेडबॉडी मिलती है पुलिस उनकी पहचान कराने का भरसक प्रयास करती है। पहचान होने पर हत्यारों तक पहुंचना आसान हो जाता है। कई मामलों में पाया गया है कि दूसरे राज्यों से लाकर डेडबॉडी फेंकी गई थी। काफी मामलों में पुलिस ने तकनीक और अन्य तरीकों से शवों की पहचान कराकर हत्यारों को अरेस्ट किया है।
-राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक