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रिटायरमेंट से 8 महीने पहले रेलवे गार्ड ने मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या की

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रेवाड़ी। रिटायर होने से महज 8 महीने पहले रेलवे गार्ड ने मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। म़ृतक की जेब से सुसाइड नोट मिला। जिसमें गार्ड ने अपनी मौत के लिए स्टेेशन अधीक्षक और ट्रैफिक इंचार्ज की प्रताड़ना को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया। गार्ड ने लिखा कि जरूरी काम होने पर भी उसे छुट्टी नहीं दी जा रही थी। राजकीय रेलवे पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर जीआरपी ने स्टेशन अधीक्षक (एसएस) व ट्रैफिक इंचार्ज (टीआई) के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया है।
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जिले के गांव चीताडूंगरा का निवासी 59 वर्षीय ताराचंद रेलवे में बतौर गार्ड कार्यरत था। बुधवार रात ताराचंद ने रेवाड़ी-फुलेरा रेलमार्ग पर गांव पाली के पास मालगाड़ी के आगे कूदकर सुसाइड कर लिया। मौके पर पहुंची जीआरपी ने शव को कब्जे में लिया। तलाशी लेने पर मृतक गार्ड की जेब से एक सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में गार्ड ताराचंद ने पिछले कुछ माह से उस पर हो रही ज्यादती का जिक्र किया। ताराचंद ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह लंबे समय से बीमारी से ग्रस्त है। छुट्टी लेने जाता तो स्टेशन अधीक्षक और टीआई मना कर देते थे। जिस दिन वह ड्यूटी पर होता, उस दिन की भी गैर हाजिरी लगा दी जाती थी। अपनी आठ माह की नौकरी को हंसी-खुशी पूरा करना चाहता था। सेवानिवृत्ति का समय नजदीक आता गया, दोनों अधिकारियों ने कुछ ज्यादा ही परेशान करना शुरू कर दिया। प्रताड़ना से परेशान होकर वह टूट गया, जिसके चलते खुदकुशी कर ली। सुसाइड नोट में ताराचंद ने लिखा कि उसकी पत्नी छोटे-छोटे बच्चे छोड़कर बीमारी के चलते बहुत पहले ही साथ छोड़ कर जा चुकी है। पत्नी की मौत के बाद उसने बड़े प्यार से अपने बच्चों को पाला है। मेरे बच्चों का मेरी मौत से कोई लेना-देना नहीं है। परिवार से मैं किसी तरह परेशान नहीं हूं, बस मुझे तो स्टेशन अधीक्षक और टीआई ने परेशान किया हुआ है। मेरे बच्चों को ख्याल रखना।
आला अधिकारियों को लिखा लेटर
जीआरपी ने सुसाइड नोट के आधार पर स्टेशन अधीक्षक व ट्रैफिक इंचार्ज के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया है। गंभीर आरोपों के चलते जीआरपी ने दोनों अधिकारियों को जांच में शामिल कराने के लिए रेलवे को लेटर भी लिख दिया है।
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ताराचंद 13 फरवरी 2019 को तीन दिन की छुट्टी लेकर किसी रिश्तेदार के यहां शादी में शामिल होने के लिए गया था। उसके बाद से ही आज तक वह वापस नहीं लौटा। उसके कभी भी छुट्टी के लिए मना नहीं किया गया। उसके द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद है।
सतपाल सिंह , स्टेशन अधीक्षक, रेवाड़ी।

सुसाइड नोट के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। इस बारे में आला अधिकारियों को भी लेटर लिख दिया गया है। रेलवे मुख्यालय को सूचित किया गया है।
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- रणबीर सिंह, एसएचओ, जीआरपी।
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