राज्य के स्वास्थ्य मंत्री महकमे को ईमानदार बनाने की कोशिश में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मुहिम चलाए हुए हैं, लेकिन सरकारी डॉक्टरों की मरीजों से पैसे मांगने की बात सामने आ ही जाती है।
बुधवार को भी एक ऐसा ही मामला सामने आया, इसमें सरकारी डॉक्टर पर इलाज के नाम पर हजारों रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। मामले में सीएमओ ने आरोपी डॉक्टर को जांच पूरी होनेे तक ओपीडी से हटाने के आदेश जारी किए हैं।
आरोपी डॉक्टर ने इस मामले को निजी डॉक्टरों की साजिश बताया है तो निजी डॉक्टरों ने इसे पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना बताया है। जांच के लिए एक कमेटी भी गठित कर दी गई है। उधर परिजन मरीज को लेकर जयपुर एसएमएस चले गए हैं।
एक्सीडेंट के चलते हुआ था मरीज भर्ती
एक्सीडेंट में दोनों पैर टूटने के बाद मूल रूप से अलवर निवासी मोनू को कुछ दिन पहले ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। मरीज के परिजनों ने ऑर्थो डॉक्टर आरके यादव पर उपचार के नाम पर हजारों रुपये की डिमांड करने और न देने पर रेफर करने का आरोप लगाकर सीएमओ डॉ. पुष्पा बिश्नोई से शिकायत की। मामले पर संज्ञान लेकर सीएमओ ने प्राथमिक जांच के बाद ऑर्थो डॉक्टर की ओपीडी कैंसिल करने की बात कही है।
पहले जमा करवाए 15 हजार फिर और मांगे 45 हजार
मरीज के परिजन राधेश्याम ने बताया कि पहले ऑपरेशन के लिए उपकरण मंगाने के लिए डॉक्टर आरके यादव ने उन्हें ट्रामा सेंटर के सामने स्थित मेडिकल स्टोर भिजवाया। यहां 15 हजार रुपये जमा कर मेडिकल स्टोर में मौजूद शख्स ने सामान खुद डॉक्टर के पास पहुंचाने की बात कही। यही नहीं 17 जनवरी को बाहर से एक डॉक्टर बुलाने के नाम पर 45 हजार रुपयों की और डिमांड की।
रकम नहीं दी तो कहा, कहीं और ले जाओ मरीज
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि 17 जनवरी को मांगे 45 हजार रुपये जमा नहीं कराए। इस पर 20 जनवरी को डॉक्टर आरके यादव ने ट्रामा सेंटर में इलाज करने की बात से साफ इंकार कर कहीं और रेफर करने की बात कही। इसके अलावा यह भी कहना है राजनीतिक संरक्षण प्राप्त एक रवि नामक शख्स ने सीएमओ से शिकायत वापस लेेने का भी दबाव बनाया है।
आरोपी डॉक्टर ने कहा निजी डॉक्टरों की लाबी का है खेल
मामले पर आरोपी डॉक्टर आरके यादव का कहना है कि उनके खिलाफ शिकायत की बात सही नहीं है। दरअसल काफी समय से निजी डॉक्टरों की एक लॉबी काम कर रही है, जो नहीं चाहती कि ट्रामा सेंटर में ठीक ढंग से इलाज हो। इससे उनकी दुकानदारी अच्छे ढंग से चलती रहे। मरीज के परिजनों से किसी विशेष मेडिकल स्टोर से उपकरण लाने को नहीं कहा था। वहीं, 45 हजार रुपये मांगने की बात भी झूठ है।
प्राथमिक तौर पर दोषी, ओपीडी से हटाया
मरीज मोनू के परिजनों की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर से पूछताछ की। मामले की पूरी जांच के लिए एक जांच कमेटी गठित की गई है। प्राथमिक तौर पर डॉक्टर की गलती सामने आई है। इसके आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई कर जांच पूरी होने तक ऑर्थो ओपीडी से हटा दिया गया है। दोषी पाए जाने पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। -डॉ. पुष्पा बिश्नोई, सीएमओ रेवाड़ी
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कोट
हालांकि पूरे मामले की जानकारी नहीं है। अगर बार-बार किसी एक ही सरकारी डॉक्टर को टारगेट किया जा रहा है तो संभव है कि कार्पोरेट लेवल के कोई निजी डॉक्टरों की लॉबी इस पर काम कर रही हो। - डॉ. करतार, एक्स. प्रेसीडेंट, आईएमए रेवाड़ी
कोट
आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई सीएमओ ने की है। अगर कोई निजी डॉक्टर इसमें संलिप्त हैं तो उन्हें सीएमओ से शिकायत करनी चाहिए। निजी डॉक्टर की कोई लॉबी ऐसे कामों में संलिप्त नहीं होती है। डॉक्टर आरके यादव का बयान पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना है।
-डॉ. शिवरतन सिंह, प्रेसीडेंट, आईएमए रेवाड़ी