अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण कार्यालय में फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी करने के मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले में जिला प्रशासन केस दर्ज कराने की भी तैयारी कर चुका है। वहीं मामले को लेकर विभाग में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि मौजूदा सचिव प्रदीप दहिया के स्थानांतरण कार्यकाल में बने अन्य लाइसेंसों की भी जांच की जा रही है।
क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण कार्यालय में भ्रष्टाचार की शिकायतें आने के बाद सरकार ने सचिव पद की जिम्मेदारी अतिरिक्त उपायुक्तों को सौंपी थी। इसके बाद एडीसी प्रदीप दहिया के पास क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव पद की भी जिम्मेदारी आ गई थी। जून माह में उनका स्थानांतरण पलवल में हो गया था और उसके बाद अंजू चौधरी को सचिव पद की जिम्मेदारी मिली थी। इसी दौरान आरटीए कार्यालय से जिले के बावल निवासी और हरियाणा रोडवेज में चालक के पद पर चयनित सतीश कुमार का हैवी लाइसेंस जारी हुआ था। सतीश कुमार का यह लाइसेंस 2015 में बना था लेकिन उस हैवी लाइसेंस की तिथि बदलकर 2012 करके डुप्लीकेट लाइसेंस जारी कर दिया गया। जब रोडवेज की तरफ से इनक्वारी की गई तो 2012 में चालक का कोई रिकार्ड नहीं मिला जिसके बाद यह मामला पकड़ में आया।
इसी बीच अंजू चौधरी का स्थानांतरण हो गया और उनके स्थान पर प्रदीप दहिया को पुन: सचिव पद का चार्ज मिला तो उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया। जब इसकी जांच प्रारंभ की गई तो इस कार्यालय के तीन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली। अब जांच पूर्ण हुई तो इस मामले में जूनियर प्रोग्रामर के पद कार्यरत रजनी ने इसकी जिम्मेदारी ली थी और उसी ने यह तिथि बदलवाकर लाइसेंस जारी कराया था। इसके बाद अब जांच पूरी होने के बाद मामले में जूनियर प्रोग्रामर को निलंबित कर दिया गया है।
इस मामले में हमने जूनियर प्रोग्रामर को निलंबित कर दिया है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि इस तरह किसी के गलत बहकावे में नहीं आए क्योंकि पूरा सिस्टम ऑनलाइन है। इस सिस्टम में गलती की कोई संभावना नहीं है। अभी इस मामले में जांच चल रही है और केस दर्ज कराने की भी प्रक्रिया की जा रही है।
-प्रदीप दहिया, सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण।