हुलिया बदलकर दिल्ली, लखनऊ, नेपाल तक घूमा हत्यारोपी
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिले में अपराध का पर्याय बन चुके एक लाख रुपये के इनामी बदमाश आलू गैंग के सरगना सुनील डुलगच को सीआईए ने एनएच-71 पर माढैया गांव के समीप से शनिवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से दो देसी पिस्तौल, एक कट्टा, नौ कारतूस और कार भी बरामद की है। डीएसपी (मुख्यालय) गजेंद्र कुमार ने रविवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि शनिवार शाम मांढैया गांव के समीप आरोपी सुनील डुलगच के होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आारोपी को मांढैया मोड़ पर दबोच लिया। गिरफ्तार करने के बाद आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। यहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
डीएसपी ने बताया कि उक्त आरोपी ने 25 फरवरी, 2017 को अन्य साथियों के साथ मिलकर झोटा गैंग के दो सदस्यों पर हमला कर संजय उर्फ चवन्नी की हत्या कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने साथियों के साथ मिलकर 27 जून, 2017 को रामगढ़ रोड पर धारूहेड़ा चुंगी वाल्मीकि बस्ती निवासी विजय व उत्तम नगर निवासी पंकज की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में कमल उर्फ पल्टी, पवन व प्रवीण उर्फ मीयां को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है जबकि सुनील पुलिस की गिरफ्त से बाहर था।
चवन्नी की हत्या के बाद से ही सुनील फरार था। इसके बाद इसने साथियों के साथ मिलकर रामगढ़ रोड पर डबल मर्डर की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद पुलिस ने इस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जो रेवाड़ी में अब तक का सर्वाधिक इनाम है। आरोपी फरार होने के दौरान हुलिया बदल- बदलकर दिल्ली, लखनऊ और नेपाल रहा। आरोपी ने अपनी कार में ही बिस्तर तक सेट किए हुए थे जबकि पुलिस को करीब एक साल तक इसकी भनक भी नहीं लगी। शनिवार को इसके रेवाड़ी आने की सूचना पर सीआईए निरीक्षक सतेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने मांढैया मोड़ से उसे गिरफ्तार किया। कार्रवाई में एएसआई संजय कुमार, एएसआई इंद्रजीत, एएसआई रणबीर सिंह, प्रधान सिपाही शिवकुमार व सिपाही बीरसिंह आदि मौजूद थे।
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शहर में गैंगवार रही है आम
रेवाड़ी में गैंगवार आम रही है। यहां आलू और झोटा गैंग में समय-समय पर खून खराबा होता रहा है। धारूहेड़ा चुंगी निवासी रवि उर्फ आलू और संघी का बास निवासी राजकुमार उर्फ झोटा पहले एक साथ काम करते थे। वर्ष 2008 में दोनों में पहली बार झगड़ा हुआ। बात इतनी बढ़ गई कि आलू गैंग के बदमाशों ने झोटा को पंजाबी धर्मशाला के पास बेरहमी से पीटा और मरा समझकर चले गए। हालांकि इस हमले में झोटा बच गया। इसके बाद दोनों के अलग-अलग गैंग बन गए। झोटा के पूरी तरह से सही नहीं होने तक दोनों के बीच किसी तरह की गैंगवार शुरू नहीं हुई। लेकिन झोटा की हालत में सुधार आने पर उसकी गैंग के बदमाश राकेश शर्मा और संदीप सोनी ने वर्ष 2014 में शहर के गांधी नगर में रवि उर्फ आलू की गोली मारकर हत्या कर दी। बदले में आलू गैंग के बदमाशों ने झोटा के भाई पर उसी के घर में फायरिंग की। बताया जाता है दोनों ही घटनाओं के समय झोटा भौंडसी जेल में बंद था।
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पांच माह से तैनात है पीसीआर
27 जून को रामगढ़ मोड़ पर धारूहेड़ा चुंगी स्थित वाल्मीकि बस्ती निवासी विजय और उत्तर नगर निवासी पंकज की हत्या के बाद लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए धारूहेड़ा चुंगी पर जाम लगाया था। लोगों का आरोप था आरोपी परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर रहे हैं। इसी के बाद सुरक्षा को देखते हुए एक पीसीआर तैनात वहां तैनात की गई थी, जो पांच माह से अभी भी तैनात है।
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बड़े गैंगस्टर्स की गिरफ्तारी से अपराध पर लगेगी लगाम
जनवरी में झोटा उर्फ राजकुमार को एक डॉक्टर से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तभी से वह जेल में है। जीता गैंग का लीलू ततारपुरिया भी फिलहाल जेल में है। ऐसे अब आलू गैंग के सरगना सुनील डुलगच के भी जेल जाने के बाद शहर में गैंगवार और अपराध पर लगाम सकती है।