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बहू ने सास के पैर नहीं दबाए थाने पहुंचा मामला,समझाने से ऐसे 4255 परिवार टूटने से बचे

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सास के पैर दबाने से लेकर पति बात नहीं मानता... बन रहे परिवार टूटने की वजह
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प्रीतम सिंह
रेवाड़ी।
मैडम मेरी सास मुझे तू कह कर बोलती है मुझे ऐसे घर में नहीं रहना। मैडम मेरा पति मेरी बात नहीं मानता मुझे उसके साथ नहीं रहना। इसके अलावा पुत्रवधू द्वारा सास के पैर नहीं दबाने से बहू को घर से निकाल दिया गया। यह किसी फिल्म के डायलॉग नहीं हैं बल्कि दिल्ली रोड स्थित महिला थाने में घरेलू हिंसा को लेकर आने वाली शिकायतों के अंश हैं।
8 अगस्त 2015 को बनाए महिला थाने में मार्च 2018 तक 4512 शिकायतें आई हैं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और मारपीट के मामले अधिक हैं। ऐसे मामलों में पुलिस समझौते का प्रयास करती है। यही कारण है कि इन शिकायतों में से 4255 का समाधान करा दिया गया। करीब चार साल में मात्र 257 शिकायतें ऐसी थीं, जिनमें समझौता नहीं होने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। पिछले कुछ सालों में महिला उत्पीड़न के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इनमें अधिकांश मामले घरेलूू हिंसा के रहे हैं। इस तरह के मामलों में पुलिस समझौते कराने का प्रयास करती है। समझौता नहीं होने पर मामला दर्ज किया जाता है। घरेलू हिंसा के 133 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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उत्पीड़न रोकने के प्रयासों के बाद भी बढ़ रही हैं शिकायतें
महिला थाने में आई शिकायतों के आधार पर यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि महिला उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसाओं की रोकथाम के लिए सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए महिला हेल्प डेस्क की स्थापना एवं महिला थानों की स्थापना महत्वपूर्ण कदम थे। उसके बावजूद भी इन मामलों में हो रही बढ़ोतरी चिंता का विषय है।

गलतफहमी भी है घरेलू हिंसा का कारण
महिला थाने में सैकड़ों मामलों को देखकर यह कहना गलत नहीं है कि आजकल पुरुष या महिला में संयम का अभाव बना हुआ है। छोटी-छोटी बातों को लेकर थानों या कोर्ट में पहुंचना आम बात हो गई है। चार साल में थाने में आए अधिकांश मामलों में सास या बहूं की कहासुनी मुख्य कारण रहे हैं।
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ये आई शिकयतें
वजर्ष 2015 में 646
वर्ष 2016 में 1997
वर्ष 2017 में 1316
वर्ष 2018 में 31 मार्च तक 553 शिकायतें आई है।
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वर्जन
महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों में पुलिस जांच पड़ताल के बाद ही कार्रवाई करती है। कई बार रंजिश में भी झूठे आरोप लगा दिए जाते है। पुलिस का प्रयास रहता है कि निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए। - हीरामणी, एसएचओ महिला थाना रेवाड़ी।
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