धारूहेड़ा। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा में आने वाले भिवाड़ी के रसायनयुक्त पानी के निकलने के बाद अब गली-मोहल्लों में गंदगी के ढेरों से दुर्गंध उठने लगी है। हालांकि अभी भी भिवाड़ी के कारखानों का दूषित पानी जगह-जगह भरा हुआ है, जिसे नगर पालिका की ओर से निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन को इसका स्थायी समाधान करना चाहिए। क्योंकि बारिश के दिनों में भिवाड़ी प्रशासन की ओर जानबूझकर दूषित पानी को छोड़ दिया जाता है, जिससे यहां के हालात बेकाबू हो जाते हैं।
भिवाड़ी के उद्योगों के दूषित पानी को भिवाड़ी के अधिकारी बारिश की आड़ में धारूहेड़ा की ओर छोड़ देते हैं, जिससे धारूहेड़ा कस्बा सहित आसपास के गांवों के हालात बदतर हो जाते हैं। भिवाड़ी से आने वाले दूषित पानी की वजह से खरखड़ा, खटावली, भटसाना सहित कई गांवों की उपजाऊ भूमि भी बंजर बन गई है। स्थानीय लोगों की ओर से कई बार जिला प्रशासन से दूषित पानी को रोकने के पुख्ता प्रबंध करने की मांग की है, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए है।
क्या कहते हैं धारूहेड़ावासी
धारूहेड़ा कस्बा के लोगों ने दूषित पानी की वजह काफी जिल्लत झेली है। लेकिन अब शहरवासी इस समस्या का स्थायी समाधान कराकर ही रहेंगे। भिवाड़ी व रेवाड़ी प्रशासन की कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन समाधान होना चाहिए। दूषित पानी की वजह से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी है। आसपास के गांवों की उपजाऊ भूमि भी बंजर हो गई है।
-कंवर सिंह, चेयरमैन नगर पालिका धारूहेड़ा
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धारूहेड़ा शहर की बदहाली के लिए अधिकारी जिम्मेदार है। स्थानीय लेागों के बार-बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके कारण आज धारूहेड़ा के लोगों को बदहाली का जीवन जीना पड़ रहा है। कस्बा में बदबू का माहौल है।
-त्रिलोक धारीवाल, स्थानीय निवासी