रेवाड़ी। 9 अप्रैल से आरंभ हो रहे चैत्र नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का काम शुरू हो गया है। नौ दिनों में मां के विभिन्न रूपों की पूजा की जाएगी। 17 अप्रैल को श्रीराम नवमी के साथ नवरात्र का समापन होगा।
इस बार नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में हो रही है। इस वर्ष के प्रारंभ में पिंगल नाम संवत्सर रहेगा, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष एकादशी शुक्रवार से 19 अप्रैल से कॉलयुक्त नामक संवत्सर का प्रवेश होगा। अष्टमी 16 अप्रैल और नवमी 17 अप्रैल को मनाई जाएगी।
चैत्र नवरात्रि के दौरान घटस्थापना उत्तर या पूर्व दिशा की ओर करना चाहिए। शहर के धारूहेड़ा चुंगी स्थित ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार, घटस्थापना का मुहूर्त 9 अप्रैल सुबह चल, लाभ, अमृत चौघड़िया सुबह 9:15 बजे से दोपहर 2 बजे तक तथा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक होगा।
उनका कहना है कि वसंत नवरात्र में दुर्गा आराधना विशेषकर श्रेष्ठ है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, जप करने से सारी इच्छाओं की पूर्ति होती है। दुर्गा सप्तशती व्यास जी द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। शास्त्री ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है।