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Rewari News: बिल्डर ने न फ्लैट दिया न पैसा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

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रेवाड़ी। फ्लैट खरीदने के लिए पैसे देने के बाद भी आवंटन न होने पर परमानेंट लोक अदालत ने एक बिल्डर पर तीन आवेदकों द्वारा दी गई पूरी राशि को देने और साथ में जुर्माना भी लगाया है। परमानेंट लोक अदालत के चेयरमैन जग भूषण गुप्ता ने सुनील कुमार को 8 लाख 76 हजार 487 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही अंतिम भुगतान की तारीख यानी 6 दिसंबर 2006 से वसूली तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित और आवेदक को उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्चों के मुआवजे के रूप में 51 हजार रुपये की राशि का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर आवेदक को उपरोक्त राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ आवेदक को उपरोक्त राशि का भुगतान करने करना होगा।
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इसी प्रकार कोर्ट ने हैली मंडी निवासी अजय यादव को अंतिम भुगतान की तारीख यानी 17 जून 2008 से वसूली तक 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ 8.37 लाख रुपये का भुगतान करने और 51 हजार रुपये की राशि का भुगतान उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने के लिए कहा है।
इसके साथ ही कोर्ट ने हैली मंडी निवासी विष्णु अजय को अंतिम भुगतान की तारीख यानी 8 दिसंबर 2007 से वसूली तक 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ 8.34 लाख रुपये का भुगतान करने और 51 हजार रुपये की राशि का भुगतान उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने के लिए कहा है।
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यह है पूरा मामला

शहर के सेक्टर एक निवासी सुनील कुमार ने बताया था कि उन्होंने एक फ्लैट के लिए आवेदन किया था और 11 अप्रैल 2006 को आवंटन के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान किया था। उसके बाद सुनील ने 4 लाख 26 हजार 487 रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान किया था। कुल 8.76 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि बिल्डर-खरीदार समझौते के अनुसार आवेदक को फ्लैट नहीं मिल सका। न ही भुगतान की गई राशि वापस की गई। उसके बाद सुनील कुमार परमानेंट लोक अदालत में गए।

बिल्डर पक्ष ने कोर्ट में दिया यह तर्क

बिल्डर पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया था कि आवेदक ने शेष भुगतान समय पर नहीं किया और इसलिए, आवेदक को फ्लैट आवंटित नहीं किया जा सका। आवेदक समझौते के नियमों और शर्तों के अनुसार भुगतान नहीं करने के लिए दोषी था और बिल्डर की कोई गलती नहीं थी। कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद तीनों पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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