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Rewari News: बॉयलर हादसा... जो बच गए उनके शरीर काम के नहीं रहे, पर्याप्त मुआवजे का मरहम भी न लगा

Thu, 09 May 2024 12:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। 16 मार्च को लाइफ लांग कंपनी में फटा डस्ट कलेक्टर। फाइल फोटो
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रेवाड़ी। धारूहेड़ा की ऑटो मोबाइल कंपनी लाइफ लाॅन्ग में 16 मार्च को डस्ट कलक्टर का बॉयलर फटने से 16 श्रमिकों की मौत हो गई थी।इस हादसे में 23 श्रमिक गंभीर रूप से झुलसे थे, जिनके शरीर अब काम लायक नहीं रह गए हैं। इनमें से अधिकतर श्रमिक अब घर बैठे हैं, इन्हें हादसे के बाद पांच लाख रुपये तक मुआवजा देने का वादा हुआ था, लेकिन ज्यादातर को कंपनी की तरफ से एक से डेढ़ लाख रुपये देकर घर भेज दिया गया है। इन श्रमिकों को अब भी मुआवजे के मरहम का इंतजार है।
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गोंडा (उत्तर प्रदेश) के तरबगंज के रहने वाले राजकुमार भी 16 मार्च को हुए बॉयलर हादसे में झुलसे थे। राजकुमार बताते हैं हादसे में वह 30 फीसदी झुलसे थे। कंपनी ने चार से पांच लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही थी। लेकिन, केवल डेढ़ लाख रुपये ही मिले हैं। राजकुमार कहते हैं अब वैसा शरीर भी नहीं रह गया है कि शहर में जाकर मेहनत मजदूरी करके अपना गुजारा कर सकें। क्योंकि शरीर के कुछ अंग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। सोचा था कि जब पैसा मिलेगा तो गांव में ही रहकर कोई छोटा-मोटा बिजनेस करेंगे, लेकिन कंपनी ने डेढ़ लाख रुपये देकर ही चलता कर दिया। अब कोई भी जवाब नहीं मिलता है, काफी परेशानी हो रही है। घर में कमाने वाला अकेला हूं। मेरी मांग है मुआवजा दिया जाए।
पूरा शरीर खराब हो चुका, मुआवजा भी आखिरी उम्मीद
फैजाबाद (यूपी) के जखौली निवासी संतोष कहते हैं हादसे में वह करीब 40 से 50% तक झुलसे थे। कहते हैं घर में अकेला कमाने वाला मैं था। छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। कंपनी से डेढ़ लाख रुपये ही सहायता राशि मिली थी। बाकी पैसों को लेकर कोई भी बात नहीं हो रही है। अगर पैसा मिलता तो काफी मदद हो जाती। पूरा शरीर खराब हो चुका है, मुआवजा ही केवल आखिरी उम्मीद है। फैजाबाद के जखौली के ही प्रीतम का कहना है कि वह घर पर कमाने वाले अकेले सदस्य हैं। उनकी शादी हो चुकी है। मुआवजा पूरा न मिलने के कारण काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
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40% तक शरीर झुलस गया, दो बच्चे हैं उनका कैसे गुजारा करूंगा

फैजाबाद के जखौली निवासी अरविंद ने बताया कि इस हादसे में करीब 40% तक झुलस गया था। उनके दो बच्चे हैं। वे घर के अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। माता-पिता की भी जिम्मेदारी है। केवल डेढ़ लाख रुपये मुआवजा दिया गया है। अगर मुआवजा मिल जाता तो काफी राहत मिल जाती। ज्यादा शरीर जलने की वजह से मेहनत मजबूरी भी करने में दोबारा से सक्षम नहीं हैं। ऐसे में अगर मुआवजा नहीं मिलता है तो आगे की जिंदगी भी काफी खराब हो सकती है।

एसआईटी की नहीं आई रिपोर्ट, चल रही जांच

डीसी की अध्यक्षता में जांच के लिए जिला स्तर की टीम गठित की गई थी। एसडीएम विकास यादव का कहना है कि टीम ने रिपोर्ट बनाकर भेज दी थी। मामले में तकनीकी पहलू काफी अधिक हैं। औद्योगिक विशेषज्ञों से जांच करवाने की सिफारिश की गई थी। कुछ समय बाद फॉरेंसिक जांच की टीम कंपनी में आई थी और सैंपल लेकर गई थी। एसआईटी गठित की गई है, अभी एसआईटी की रिपोर्ट भी नहीं आई है, कुल मिलाकर जांच पड़ताल जारी है।

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वर्जन
-डस्ट कलक्टर का बॉयलर फटने के मामले में अभी एसआईटी की रिपोर्ट नहीं आई है। जांच पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

-जगदीश चंद, प्रभारी, थाना धारूहेड़ा


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-कंपनी की तरफ से घायलों को सीधे खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया था और जो मृतक थे उनके आश्रितों को चेक के माध्यम से पैसा दिया गया। जो भी डाटा है, वह संबंधित अधिकारी को भेज दिया गया है। कोई भी मृतक और घायल श्रमिक ऐसा नहीं बचा है, जिसको पैसा नहीं भेजा गया है। अगर कोई श्रमिक ऐसा कहता है कि पैसा नहीं भेजा गया है तो वह आकर बात कर सकता है, हमारे पास पैसा भेजने की पूरी लिस्ट है।
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-सुभाष राणा, जीएम हेड, लाइफ लाॅन्ग कंपनी
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