रेवाड़ी। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कीट वैज्ञानिक दो दिन गांव रणसीका चौपाल और जुगनू एग्री फार्म जैतपुर में अभिरुचि कार्यक्रम चलाया। बताया गया कि कीट प्रबंधन में पक्षी मदद करते हैं।
प्रति वर्ष फसलों में कीटों से किसान आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। इससे बचने के लिए किसान विभिन्न केमिकलों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। इस समस्या के निदान के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद दो दिवसीय अभिरुचि कार्यक्रम चला रहा है। इसमें एक्सपर्ट कृषि वैज्ञानिक अधिकारी किसानों से रूबरू हो रहे हैं।
विभिन्न मॉडलों, भाषणों और प्रोजेक्टर के माध्यम से किसानों को जरूरी जानकारी दी जा रही है। डॉ. वंदना पांडे उपनिदेशक ने पहले दिन और डॉ .वीडी निगम उप निदेशक ने दूसरे दिन किसानों को जानकारी दी। बताया गया कि कीट प्रबंधन में पक्षी हमारी मदद करते हैं। पक्षियों को फसलों के नजदीक लाने के लिए बांस के डंडे लगा पक्षियों के बैठने की व्यवस्था करनी चाहिए। उसपर हमें परेशान करने वाले कुछ कीड़ों को चिपका देना चाहिए। पक्षी मचान पर आकर्षित होकर वहां बैठेंगे। उसके बाद वे फसल पर लगे बहुत से कीड़ों को खुद खा जाएंगे।
डॉक्टर लक्ष्मी चंद ने बताया कि 10 प्रतिशत फसल का नुकसान चूहों से होता है। वैज्ञानिकों ने चूहों की समस्या के निदान बताए। इस दौरान कीट प्रबंधन अधिकारी डॉ. सुनील चंद्रा सहायक निदेशक, डॉ. लक्ष्मी चंद वनस्पति संरक्षण अधिकारी जमुना नेगी, वनस्पति संरक्षण अधिकारी गौरव चौहान सहायक, वनस्पति संरक्षण अधिकारी रामजीत मौर्या, कुमारी दीपिका चक्रवाल, सूरज बर्नवाल, लखमी चंद वैज्ञानिक और किसान मौजूद रहे। किसानों ने अपनी समस्याओं का निदान जाना।
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खरीफ की फसल में ग्रीन कैटरपिलर का प्रकोप
खंड कृषि अधिकारी डॉक्टर संदीप यादव ने बताया कि दक्षिण हरियाणा में खरीफ की फसल में ग्रीन कैटरपिलर का प्रकोप चल रहा है। आने वाले 15 दिन और रहेगा। इसकी कोई दवाई अभी नहीं आई है। लाइट ट्रैप विधि से इसका समाधान किया जा सकता है।
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शाम 6 से 10 बजे तक लाइट जरूर जलाएं
खेत के कोठड़ों के बाहर बल्ब लगाएं और उसके नीचे एक तसला पानी में डीजल या किसी डिटर्जेंट की बूंद डाल दें। शाम 6 से 10 बजे तक बल्ब जलाने के बाद उसे बंद कर दें। अधिकतर कीट लाइट से आकर्षित होंगे और लाइट बंद होने पर तसले के पानी में गिरकर मर जाएंगे।