रेवाड़ी। बावल स्थित कन्या महाविद्यालय। संवाद
बावल। क्षेत्र का कन्या महाविद्यालय अपने दिन काट रहा है। छात्राओं की संख्या करीब 500 है। 9 कमरों की जरूरत है। मौजूदा समय में चार कमरे हैं। इसमें से दो में लैब और अन्य कार्य होते हैं। दो ही कमरे छात्राओं के लिए हैं। क्लास बरामदे में लगती है। लंबे समय से कमरों की मांग की जा रही है, लेकिन इस और कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दोपहर को धूप निकलने के बाद छात्राएं परेशान होने लगती हैं। बता दें कि सरकार ने 20 किलोमीटर के दायरे में कन्या महाविद्यालय खोलने के निर्देश दिए थे। इसे देखते हुए वर्ष 2018 में बावल के कन्या स्कूल में ही कॉलेज की क्लास लगानी शुरू कर दी गई थी, जर्जर भवन के कारण बीते तीन वर्ष प्राइमरी स्कूल में कॉलेज शिफ्ट कर दिया गया था। आलम यह है की उधार के तीन कमरों में महाविद्यालय चल रहा है।
तिहाड़ा निवासी जय कौशिक ने बताया की 2019 में पांच एकड़ जमीन कॉलेज के लिए दान दी थी। इसकी रजिस्ट्री हो चुकी है। दो साल कोरोनाकाल में निकल गए, जब बजट आया तो बीते तीन साल से धीमी गति से बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अभी तक जारी है। कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि पढ़ाई के समय प्राइमरी की बच्चियों का शोर होता रहता है। कॉलेज में तीनों संकाय की 520 छात्राएं हैं। बीए, बीकॉम, बीएससी की पढ़ाई होती है। कॉलेज में 17 टीचरों के पद प्रस्तावित हैं। कई बार स्टाफ की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
वर्जन
हाल ही में स्टाफ ने निरीक्षण किया था। भवन निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। चार महीने में नया भवन मिलने की उम्मीद है।-ममता गुप्ता, प्राचार्य, कन्या महाविद्यालय बावल