रेवाड़ी। देश में बढ़ते जल संकट को लेकर खोरी संस्थान के संस्थापक सुंदर लाल 65 साल की उम्र में भी आसपास के जिलों में जाकर लोगों को जल संरक्षण को लेकर जागरूक कर रहे हैं। 44 साल पहले महज 21 साल की उम्र में उन्होंने भांप लिया था कि आने वाले समय में पानी की किल्लत होगी।
21 साल की उम्र में चार दोस्तों के साथ मिलकर वर्ष 1979 में सक्रिय संस्था खोरी का गठन किया। संस्था का गठन कर सुंदर लाल ने अपने साथियों को साथ लेकर सबसे पहले अपने घरों में जल संरक्षण का सिस्टम तैयार किया तथा फिर मिशन जल-जागरण शुरू किया। 44 साल पहले पांच सदस्यों के साथ बनी संस्था में आज भी सक्रिय रूप से भले ही 20 सदस्य हो, परंतु क्षेत्र के हजारों समाजसेवियों के साथ संस्थान ने रेवाड़ी के अलावा महेंद्रगढ़-नारनौल, झज्जर के अधिकतर गांवों में जल संरक्षण का संदेश लेकर पहुंच चुकी है। इनके अलावा भिवानी, चरखी दादरी व साथ लगते राजस्थान तक आंशिक रूप से अपनी पहुंच बना चुकी है।
40 साल में कराया 3 हजार से अधिक वाटर टैंकों का निर्माण
40 तक विस्तार साल की अवधि में संस्था के सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए तीन हजार से अधिक वाटर टैंकों का निर्माण करवाया है। जल संरक्षण का संदेश देने से संस्था ने अब अभियान को गति देना आरंभ कर दिया है। अपने जल जागरण अभियान में संस्था का उद्देश्य बारिश के पानी को संग्रहित करवाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ ही पानी बचाने को लेकर जागरूक करने पर भी रहता है। सक्रिय संस्था खोरी जल जागरण अभियान चलाने के साथ ही जरूरत के अनुसार लोगों को वर्षा का पानी संचयित करने तथा घरों में प्रयोग होने वाले पानी को दोबारा प्रयोग करने लायक बनाने के लिए तकनीक मुहैया करवाने के साथ ही आर्थिक सहयोग भी करती है।
समय के साथ सरकार व संस्थाओं का स्वरूप भी बदल गया है। संस्थाएं पहले अपने काम पर फोकस रखती थी, जबकि आज काम से ज्यादा पैसे पर नजर रहती है। अधिकारी आज भी जनहित व जनकल्याणकारी योजनाओं का गंभीरता से लेने की बजाय औपचारिकताओं से बाहर नहीं निकल पाए हैं। जिस कारण अधिकतर-योजनाएं उम्मीद के मुताबिक इंपैक्ट नहीं छोड़ पाती। हां प्रधानमंत्री के मुंह से निकलने वाले शब्द लोगों को जरूरत प्रेरित करते हैं।
सुंरदलाल, डायरेक्टर, खोरी संस्थान