संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला शिक्षा विभाग की ओर से जिले के दस सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को अब खगोल विज्ञान की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से 10 विद्यालयों में एस्ट्रोनॉमी की प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं जिनका नाम यजुर्वेदशाला रखा गया है। इन प्रयोगशालाओं में विभाग की तरफ से किट व अन्य सामग्री पहुंचा दी गई हैं। नए शैक्षणिक सत्र से सभी प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाएगी।
शिक्षा विभाग की इस पहल से जहां विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी। वहीं, प्रयोगशालाओं में कार्यरत मॉडलों व टेलीस्कोप के माध्यम से विद्यार्थी चांद, तारों का अध्ययन कर सकेंगे। जल्द ही सभी प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी प्रयोगशालाओं में आईआईटी इंदौर से उपकरण मंगाए गए हैं। क्योंकि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से आईआईटी इंदौर के साथ एमओयू साइन किया गया है। लैब में 30 वर्किंग मॉडल्स के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न खगोलीय घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वहीं टेलीस्कोप के माध्यम से आकाश में होने वाली घटनाओं को निहार सकेंगे। ये सभी उपकरण विद्यालयों में पहुंच चुके हैं। आईआईटी इंदौर की टीम शिक्षकों को प्रशिक्षण एस्ट्रोनामी लैब के संचालन का प्रशिक्षण चयनित शिक्षकों को देगी। इस दौरान शिक्षकों को खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि विद्यार्थियों को इसकी बारे में जानकारी प्रदान की जा सके। सभी विद्यालयों ने इसकी तैयारियां शुरु कर दी हैं।
दस विद्यालयों में बनाई गई प्रयोगशालाएं
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से 10 राजकीय मॉडल संस्कृति व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में एस्ट्रोनॉमी प्रयोगशाला बनाई गई है। इन स्कूलों में बोलनी स्कूल, बोड़िया कमालपुर स्कूल, पीथड़ावास स्कूल, गुडियानी स्कूल, रावमावि बावल, रेवाड़ी स्कूल व रावमावि पाल्हावास, नाहड़ स्कूल, कुंड स्कूल व काकोड़िया स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों की प्रयोगशालाओं में लगभग उपकरण भेज दिए गए हैं।
सभी स्कूलों में एस्ट्रोनॉमी प्रयोगशाला बना दी गई है। विभाग ने इन प्रयोगशालाओं का नाम यजुर्वेदशाला रखा है। इन सभी प्रयोगशालाओं में उपकरण भी पहुंचा दिए गए हैं। इनमें प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को कार्यरत मॉडलों व टेलीस्कोप के माध्यम से चांद, तारों और आकाश के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चों के कौशल में विस्तार होगा।- सुभाष चंद्र, जिला परियोजना समन्वयक रेवाड़ी।