रेवाड़ी। छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है। शनिवार को खरना था। महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा। छठी मैया के लिए प्रसाद भी तैयार किया गया। खरना की शाम को गुड़ से बनी खीर का भोग लगाया गया। भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की गई और व्रतियों ने छठी मैया के गीत भी गाए। खरना में खीर के साथ दूध और चावल से तैयार किया गया पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी भी तैयार की गई। इसके साथ ही छठ का प्रमुख प्रसाद ठेकुआ तैयार किया गया। पूर्वांचल समिति की ओर से फिलहाल तैयारी पूरी कर ली गई है। आज सभी तैयार किए गए तालाबों में पानी भरा जाएगा। शहर में सोलहराही, कोंसीवास रोड, उत्तम नगर, विजय नगर, सहित धारूहेड़ा में सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के नियम
आज व्रतधारी महिलाएं और पुरुष निर्जल व्रत रखते हैं और शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। रात में जागरण किया जाता है। पंडित वेद प्रकाश तिवारी ने बताया कि अर्घ्य देने के लिए एक लोटे में जल लेकर उसमें कुछ बूंदें कच्चा दूध मिलाएं। इसी पात्र में लालचन्दन, चावल, लालफूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजलि अर्पित करना चाहिए। इस समय अपनी दृष्टि को कलश की धारा वाले किनारे पर रखेंगे तो सूर्य का प्रतिबिम्ब एक छोटे बिंदु के रूप में दिखाई देगा एवं एकाग्रमन से देखने पर सप्तरंगों का वलय नजर आएगा। अर्घ्य के बाद सूर्यदेव को नमस्कार कर तीन परिक्रमा करें। टोकरी में फल और ठेकुवा आदि सजाकर सूर्यदेव की उपासना करें। उपासना और अर्घ्य के बाद आपकी जो भी मनोकामना है, उसे पूरी करने की प्रार्थना करें। सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 29 मिनट का है।