रेवाड़ी। जिले में एक सप्ताह में डेंगू के 3 मामले आ चुके हैं। दो पहले और एक केस सोमवार को जाटूसाना के गांव परखोत्तमपुर क्षेत्र में मिला है।
जिन घरों में मच्छर के लार्वा मिलते हैं वहां नोटिस थमाया जा रहा है। अब तक 45 से ज्यादा लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। विभाग ने शहर व गांवों में लार्वा की जांच तेज कर दी है। पिछले वर्ष बार-बार चेतावनी के बाद भी जिन घरों में लार्वा मिले तो उनके चालान भी काटे गए थे। इधर, लगातार डेंगू के केस मिल रहे हैं, लेकिन फॉगिंग के लिए कोई विशेष प्लानिंग तक नहीं है। हर साल यह समस्या सामने खड़ी होती है। इस बार डेंगू का डंक और खतरनाक नजर आ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जहां केस निकले, वहां फॉगिंग कराई जा रही है। वहीं शहर के नागरिक अस्पताल में डेंगू पीड़ितों के लिए 7 बेड की व्यवस्था की गई है।
डेंगू के हर रोज 10 से 15 नमूनों की जांच की जा रही है। डेंगू के एलाइजा टेस्ट सिविल अस्पताल में ही लगते हैं। सीएचसी-पीएचसी पर डेंगू की जांच की कोई सुविधा नहीं है। इन संस्थानों से केवल सैंपल एकत्रित किए जाते हैं। अब तक 300 से ज्यादा सैंपल जांच किए जा चुके हैं।
चिकित्सकों के अनुसार डेंगू के सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार, गंभीर सिर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जी मिचलाना, उल्टी करना व खुजली जैसे लक्षण हो तो बिल्कुल नजरंदाज न करें। विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाकर उचित उपचार कराएं।
वर्जन:
नागरिक अस्पताल में डेंगू पीड़ितों के लिए 7 बेड की व्यवस्था की गई है। अगर जरूरत पड़ती है तो बेड की संख्या बढ़ा दी जाएगी। इसी प्रकार सीएचसी-पीएचसी में भी दो-दो बेड लगाए गए हैं। सब डिवीजनल सामान्य अस्पताल कोसली में भी डेंगू वार्ड बनाया गया है।
बीरेंद्र सिंह यादव, हेल्थ इंस्पेक्टर