कोसली। कोसली व भाकली के बीच भवन के शिलापट्ट को लेकर जारी वाद बुधवार को शांतिपूर्वक निपट गया। ग्रामीणों की ओर से बुधवार को एसडीएम कोसली को ज्ञापन सौंपने की सूचना के बाद उपमंडल प्रशासन सतर्क रहा। सुबह से ही लघु सचिवालय पर पुलिस मुस्तैद नजर आई। बाद में ग्रामीणों ने तहसीलदार को अपना एक ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
कोसली संघर्ष समिति के प्रधान रामफल कोसलिया के नेतृत्व में कोसली के ग्रामीणों ने एक सरकारी भवन के उद्घाटन पट्ट पर दर्ज नाम को लेकर और कोसली को नगर पालिका बनाने की मांग को लेकर तहसीलदार जितेंद्र कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें कोसली अनाज मंडी के पास बने भूमि एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला भवन के उद्घाटन पट्ट पर दर्ज स्थान के नाम को लेकर कोसलीवासियों में रोष था। 2013 में भाकली-कोसली के बीच एक विवाद हुआ था, बाद में इतना बढ़ा कि इसमें कोसली के पूर्व सैनिक महावीर की मौत भी हो गई थी।
मामले में भाकली गांव के दर्जन भर लोगों पर हत्या का वाद भी चला आरोपियों को जेल भेज दिया गया। बाद में 13 अगस्त 2014 को इन दोनों गांवों के मौजिज लोगों की एक बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में इन गांवों के लोग आपसी भाईचारा बनाकर रखेंगे। किसान विश्राम गृह और रेलवे ओवरब्रिज पर किसी भी गांव का नाम नहीं लिखा जाएगा। नामकरण को लेकर कोई विवाद नहीं करेंगे। मामले में बुधवार को कोसली गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर मौन जुलूस निकाला और सचिवालय पहुंच एसडीएम के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार जितेंद्र कुमार मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर होशियार नंबरदार, तेजपाल यादव, ओमप्रकाश डाबला, पूर्व उपाध्यक्ष रवि यादव, प्रेम कुमार, पूर्व जिप उपाध्यक्ष कैलाश, सरोज यादव, रमेश शर्मा, नम्बरदार विजय आजाद, पूर्व सरपंच बलवान, पंच अनिल, रमेश मास्टर, प्रेम यादव, कैप्टन सर्वसुख, राजसिंह आर्य, एडवोकेट जितेंद्र कुमार, मुख्याध्यापक रामकिशन, रिंकू कोसलिया आदि मौजूद रहे।