रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में महिला अध्ययन केन्द्र, बाबा मस्तनाथ व महंत चांदनाथ पीठ के संयुक्त तत्वावधान में दक्षिण एशिया में आर्थिक व सामाजिक विकास में महिलाओं की भागीदारी, भूमिका, स्थिति तथा चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। डॉ. अन्जू आहूजा ने कहा कि हमारे संविधान में महिला और पुरुष में समानता का अधिकार दिया गया, लेकिन समय के साथ-साथ आर्थिक व सामाजिक असमानता बढ़ती चली गई। महिलाओं के कंधों पर बहुत अधिक कार्य है और उनके इन घरेलू कार्यों की सही से पहचान नहीं हो पाई। अशिक्षा कुपोषण का शिकार है। उन्होंने कई महिलाओं के उदाहरण देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधारों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. मारकंडे आहूजा ने कहा कि इस संगोष्ठी का शीर्षक बहुत ही महत्वपूर्ण व प्रासंगिक है। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं पहले से ही सशक्त है। उन्होंने कहा कि हमें व्याप्त असमानता का अध्ययन करने की आवश्यकता है जिससे हम महिलाओं से जुड़ी समस्याओं का सही तरीके आकलन कर सके। डॉ. अन्नपूर्णा शर्मा ने कहा कि आज आवश्यकता एक नई व आधुनिक शोच से महिलाओं को उनका उचित स्थान देने का है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि आज विश्व बहुत बड़े परिवर्तन से गुजर रहा है जहां महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है और वे कई महत्वपूर्ण संस्थाओं का नेतृत्व कर रही है। प्रोफेसर तेज सिंह, डॉ. शैलेन्द्र हुड्डा, डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. सुनील फोगाट, डॉ. रविन्द्र, डॉ. महाबीर बड़क, डॉ. देवेन्द्र सिंह तथा अमित दांगी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर देश भर के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जिसमें अलग-अलग विषयों पर प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन में स्वागत भाषण महिला अध्ययन केन्द्र की समन्वयक डॉ. सीमा महलावत ने किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. रीना हुड्डा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।