रेवाड़ी। 75 वर्ष से अधिक उम्रदराज पेड़ों को संजीवनी देने के लिए राज्य सरकार की ''''प्राणवायु देवता पेंशन स्कीम'''' लोगों को लाभ पहुंचाएगी। स्कीम के तहत वन विभाग की ओर से जिले के 680 बूढ़े पेड़ों को चिन्हित करके सालाना पेंशन पेड़ों के मालिकों के खातों में डाल दी गई है। जिले में 18.70 लाख रुपये की पेंशन डाली गई है। इस पेंशन से बूढ़े पेड़ों को खुराक मिलने से उनका जीवन बढ़ेगा। इस योजना में पेड़ मालिक को सालाना 2750 रुपये की पेंशन दी जा रही है। इस धनराशि को पेड़ के लिए खाद देने और देखभाल में खर्च किया जाएगा।
जिले की तीन रेंज रेवाड़ी, बावल व नाहड़ में वन विभाग को प्राणवायु देवता पेंशन स्कीम के तहत 941 के करीब आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 680 पेड़ों की पेंशन शुरू कर दी गई है। वन विभाग ने पंचायतों, सामान्य लोगों व संस्थाओं से आवेदन मांगे थे। इस योजना में खेत, पंचायत की जमीन, सामुदायिक भूमि, संस्थागत भूमि, वेस्ट लैंड, प्राइवेट लैंड और घरेलू जमीन पर लगे पेड़ों को शामिल किया गया है। पेड़ की स्थिति सूखा व मृत में नहीं होनी चाहिए। पांच साल बाद इन पेड़ों की दोबारा से समीक्षा की जाएगी।
समय-समय पर पेड़ों का होगा निरीक्षण
वन विभाग की ओर से 680 पेड़ों पर मालिक का नाम, पेड़ की प्रजाति, पेड़ की आयु, पेड़ की मोटाई व लंबाई सहित अन्य जानकारी के बोर्ड लगाए जाएंगे। सरकार की प्राण वायु देवता पेंशन योजना से पेंशन पाने वाले लाभार्थी भी खुश नजर आ रहे हैं। सरकार की यह योजना पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी है, इससे वृक्ष भी बचेंगे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। समय-समय पर पेड़ों का निरीक्षण भी किया जाएगा। अगर पेड़ सूख जाता है या फिर अन्य परिस्थितियों में खत्म हो जाता है तो विभाग की ओर से उस पेड़ की पेंशन बंद कर दी जाएगी।
पेड़ों की उम्र 75 वर्ष से लेकर 150 वर्ष तक मिली
आरएफओ संदीप यादव ने बताया कि बड़, पीपल, नीम व जंड प्रजाति के पेड़ों को पेंशन का लाभ दिया गया है। इनमें सबसे ज्यादा बड़ व पीपल के पेड़ शामिल हैं। इन पेड़ों की उम्र 75 वर्ष से लेकर 150 वर्ष तक मिली है। जिले के रामपुरा गांव में सबसे ज्यादा 60 से अधिक पुराने पेड़ों की पेंशन शुरू की गई है। इस स्कीम से जहां पुराने पेड़ों की देखभाल करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं नई पीढ़ी भी पेड़ों की अहमियत को समझ सकेगी।
प्राण वायु देवता पेंशन स्कीम बूढ़े पेड़ों के लिए लाभदायक है। सरकार का मकसद है कि बूढ़े पेड़ों को बचाया जा सके जिस वजह से यह स्कीम शुरू की है।
दीपक प्रभाकर पाटिल, डीएफओ, रेवाड़ी