रेवाड़ी। चार दिन से जिले के न्यूनतम तापमान में गिरावट रहने से सब्जियों में 30 से 35 व सरसों में 10 से 15 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है। शीतलहर के चलते बेलवाली सब्जियों के पत्ते पूरी तरह सिकुड़ गए। इनमें 50 से 75 फीसदी तक नुकसान माना जा रहा है। हालांकि ठंडक बढ़ने से गेहूं की फसल पूरी तरह रंगत पर है। इनमें फिलहाल फायदा बताया जा रहा है। मंगलवार को जिले का न्यूनतम तापमान 0 डिग्री व अधिकतम 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 20 जनवरी से तापमान के बढ़ने से सर्दी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
पाले से सर्वाधिक नुकसान सब्जियों व सरसों की खेती को हो रहा है। किसानों के मुताबिक बैंगन, खीरा, लौकी, गोभी, टिंडा, टमाटर, गाजर, मूली, पालक, धनिया, मेथी व मटर आदि में करीब 30 से 35 फीसदी तक खराब हुआ है। पपीते के पौधों के पत्ते जल गए। उद्यान विभाग के अनुसार फिलहाल खराबे की उनके पास सूचना नहीं आई है। सब्जियों में 8 से 10 फीसदी नुकसान संभव है। नुकसान का आकलन करा रहे हैं। इस बार 2000 हेक्टेयर में सब्जियों की बुआई की गई। कड़ाके की ठंड से खेतों व जंगल में कई स्थानों पर बर्फ की परत जम गई। मंगलवार रात पाला पड़ने से सब्जियों में नुकसान हुआ है।
पपीते, बैंगन, लौकी के पत्ते पीले पड़ गए, फूल गोभी की फसल में भी नुकसान
सब्जी उत्पादक रामनिवास का कहना है कि सरसों, बैंगन, मटर, गोभी व बेलवाली सब्जियों आदि की फसलों के पत्ते ठंड से सिकुड़कर गलने जैसे दिखाई देने लगे है। कालड़ावास निवासी भीम सिंह का कहना है कि ठंड से सरसों की फसल में भी 10 से 15 फीसदी तक नुकसान है।
30 हजार हेक्टेयर गेहूं
जिले में रबी फसल के तहत करीब 30 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ठंड से इन फसलों का नुकसान नहीं है। किसानों का भी कहना है कि सर्दी की रंगत से ही गेहूं, जौ व चने की फसल रंगत पर आती है।
2000 हेक्टेयर में सब्जियां, पाले से बचाने की सलाह दे रहा विभाग
उद्यान विभाग के निदेशक मंदीप यादव ने बताया कि सब्जियों में अभी खराबे की सूचना नहीं है। फिर भी सब्जियों में 8 से 10 फीसदी नुकसान संभव है। नुकसान का आंकलन करा रहे है। इस बार करीब 2000 हेक्टेयर में सब्जियों की बुवाई की गई। उन्होंने बताया कि तापमान में गिरावट होने से सरसों, मटर व सब्जियों की फसलों में नुकसान होने की संभावना है। पाले के कारण पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जल जमने से कोशिका भित्ति फट जाती है, जिससे पौधों की पत्तियां, कोंपलें, फूल, फल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पोर्टल पर अपना पंजीकरण जरूर कराना चाहिए।