हरियाणा के रेवाड़ी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव की अदालत ने मंगलवार को नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म और एससी-एसटी मामले के दोषी को 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
दर्ज मामले के अनुसार जिले के एक गांव की निवासी महिला ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वह अनुसूचित जाति से संबंधित है। उसकी तीन पुत्रियां व एक पुत्र है। उसकी एक पुत्री 30 जून 2020 को शाम करीब 6 बजे शौच के लिए खेत में गई थी। जब वह देर शाम तक घर नहीं आई तो महिला व उसके परिजनों ने बेटी की तलाश शुरू कर दी, मगर वह कहीं नहीं मिली।
महिला ने पुलिस को दी शिकायत में यह आरोप लगाया कि ताराचंद उर्फ अविनाश निवासी मोरूडी, जिला अलवर राजस्थान जो इस महिला के गांव में टाइल लगाने का कार्य करता था और तीन साल से गांव में ही रहता था, वह काफी समय से उसकी पुत्री पर गलत नजर रखता था।
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28 जून 2020 को उसे इस महिला को धमकी भी दी कि वह अपहरण कर लड़की को ले जाएगा। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि ताराचन्द्र उर्फ अविनाश पर उसकी पुत्री को अपहरण कर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया है। इस महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर इस लड़की को बरामद किया।
जांच के दौरान धारा 3 एससी-एसटी एक्ट व 4 पॉक्सो अधिनियम भी जोड़े गए। जांच पूरी होने पर पुलिस ने अदालत में मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने आरोपी के खिलाफ गवाह व तथ्य पेश किए, जिनके आधार पर अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश अर्चना यादव ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376 (3) में उक्त आरोपी को दोषी करार देते हुए इसे 20 साल कठोर कारावास तथा 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 363 में 7 साल का कारावास एवं 10 हजार जुर्माना, धारा 366 में 10 साल की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा 3 एससी-एसटी एक्ट में एक साल की सजा व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।