रेवाड़ी। परमानेंट लोक अदालत के चेयरमैन जगभूषण गुप्ता ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से अदालतों में चलने वाले केस की संख्या में कमी तो आती ही है, साथ ही आपसी सहमति से दोनों पक्षों के बीच समझौता भी होता है। गुप्ता शुक्रवार को स्थाई लोक अदालत परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में वादी और प्रतिवादियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामले कोर्ट में जाने के बाद उनका निपटारा होने में समय लगता है। इससे केस दायर करने वाले व दूसरे पक्ष को बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। राष्ट्रीय लोक अदालतों में ऐसे मामलों का निपटारा आपसी समझौतों के आधार पर कराया जाता है। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के प्रयास किए जाते हैं। इस मौके पर पीएलए की सदस्य सुदेश कुमारी भी उनके साथ मौजूद थीं। लोक अदालत में 116 मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निपटारा कर दिया गया। बैंकों व फाइनेंस कंपनियों से जुड़े अधिकांश मामलों में राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लगभग 1.42 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट सुनील भार्गव व कई अन्य अधिवक्ता इस मौके पर मौजूद थे।