करनाल के इंद्री गांव धूमसी में शिक्षकों और समाजसेवियों की ओर से चलाया जा रहा अभियान जोर पकड़ने लगा है। शिक्षा की अलख जगाने के लिए लगाई जा रही कक्षाओं का ग्रामीण जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
इन ग्रामीणों का कहना है कि बचपन में कई कारणों से वह शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके जिसके कारण वह समय की दौड़ में पिछड़ गए हैं। इन लोगों ने कहा कि इस उम्र में शिक्षा प्राप्त कर वह साक्षर होने का सपना पूरा कर रहे हैं।
गांव में अनपढ़ महिलाएं भी कक्षाएं लगाने के लिए उत्सुक हैं और जल्द ही कक्षाओं में महिलाओं की उपस्थिति भी होंगी।
गांव के राजकीय स्कूल में शिक्षक राजपाल, सुलेख शर्मा, अरवन शर्मा, संजय शर्मा, सुरेंद्र कुमार, देशराज, भूपेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र धूमसी निरक्षरों को अपने-अपने अनुभव के आधार पर पढ़ा रहे हैं।
रविवार को लगी कक्षा में 22 से लेकर 60 वर्ष की उम्र से भी ऊपर के साक्षरों ने हिस्सा लिया। अभियान के दौरान निरक्षरों को स्लेट, चॉक और कॉपी उपलब्ध करवाई हुई है।
निरक्षर घर से ही थैला में स्लेट बत्ती और कॉपी लेकर कक्षा में आते हैं। कक्षा में शिक्षक देशी तरीकों से पढ़ा रहे है इससे निरक्षरों की पढ़ाई के प्रति रूचि भी बढ़ी है। फिलहाल, कक्षा सप्ताह मेें दो दिन लग रही हैं।
निरक्षर समय से पहले ही कक्षा में पहुंचने लगे हैं और शिक्षकों के कक्षा में पहुंचने से पहले ही घर से लिखकर लाए होमवर्क को चेक किया जाता है।
शिक्षक सुलेख शर्मा ने कक्षा में बताया कि शिक्षा हमें शोषण से बचाती है। पहले लोग कम पढ़े लिखे थे लोगों में जागरूकता की कमी थी। पढ़ लिखकर जागरूक होने की जरूरत है।
सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा और आंगनबाड़ी वर्कर राजबाला ने बताया कि गांव की कई अनपढ़ महिलाएं उनसे पढ़ने-लिखने के लिए संपर्क करने लगी हैं। उन्होंने गांव में बनी शिक्षकों और समाजसेवियों की बनी टीम के बीच यह बात रखी।