भिवानी: धान बर्बाद, गेहूं बो नहीं पाए
जिले में 20 से 25 हजार एकड़ में धान की फसल जलभराव के कारण खराब हुई और गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई है। गांव तालू, धनाना, जताई, बड़ेसरा, मिताथल, और बापोड़ा से सूई रोड, दौलतपुर खेड़ी के खेतों में अब पानी सूख रहा है।
हिसार: पानी न निकलने से गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी
खेतों से बारिश के पानी की निकासी नहीं होने के कारण गेहूं की फसल की बिजाई नहीं हो सकी है। सबसे अधिक गांव बधावड़ में करीब 550 एकड़ में बारिश का पानी भरा हुआ है। जिले में करीब 6090 एकड़ में बारिश के कारण जलभराव था, जिसमें से करीब 2700 एकड़ में पानी की निकासी हो चुकी है।
फतेहाबाद: घटने की जगह बढ़ गया जलभराव क्षेत्र
जिले में जलभराव क्षेत्र कम होने की बजाय और बढ़ गया है। मानसून के सीजन में हुई बारिश का पानी अब भी कई गांवों के खेतों में भरा हुआ है। जल निकासी न होने के कारण यहां पर गेहूं की बिजाई नहीं हो पा रही है। जिले में करीब 11 हजार एकड़ जमीन अब जलभराव क्षेत्र के अंतर्गत आ गई है।
सोनीपत: पानी निकलने के बाद भी गेहूं की बिजाई होना मुश्किल
सोनीपत के गांव जुआं-1 के किसानों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां बारिश में करीब 500 एकड़ फसल में जलभराव हुआ था। ग्रामीणों के लघु सचिवालय पर प्रदर्शन व लगातार दिए धरने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पानी निकासी का प्रबंध किया। यहां अब भी करीब 300 एकड़ खेतों में पानी जमा है। किसानों का कहना है कि पानी निकलने में अभी करीब 10 दिन का समय और लगेगा। पानी निकासी होने के बाद भी गेहूं बिजाई नहीं हो सकेगी। जलभराव के कारण करीब 350 एकड़ में फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। खरखौदा के गांव बिधलान में 50 एकड़ भूमि पर बारिश का पानी भरा है। गोहाना में गांव कथूरा में बारिश के बाद करीब 200 एकड़ फसल में जलभराव हुआ था। वर्तमान में करीब पांच एकड़ में ही पानी खड़ा है।
यमुनानगर: प्रतापनगर खंड की ज्यादातक जमीन सेमग्रस्त
यमुनानगर जिले के प्रतापनगर खंड में पहाड़ों, यमुना नदी व सोम नदी से सटे क्षेत्र में ज्यादातर जमीन सेमग्रस्त है। पहाड़ों से सालभर पानी रिसता रहता है, जिस कारण इस जमीन में हर समय पानी जमा रहता है। सेम ग्रस्त जमीन में साल में केवल धान की फसल ही किसान ले पाते हैं। ऐसी जमीन में किसान सफेदा लगा सकते हैं, क्योंकि इसे पानी की ज्यादा जरूरत होती है।
अंबाला: शहजादपुर और नारायणगढ़ को छोड़ सभी ब्लॉकों में सेमग्रस्त भूमि चिह्नित
अंबाला के शहजादपुर और नारायणगढ़ को छोड़कर सभी ब्लॉकों में सेमग्रस्त भूमि हाल ही में कृषि विभाग के सर्वे में चिह्नित की गई है। अभी तक इस मामले में कृषि विभाग की तरफ से कोई खास कदम नहीं उठाया गया था। अंबाला में इस भूमि पर अभी तक फसल नहीं बोई गई है।
कैथल: पानी जमा होने से नहीं हो पाई गेहूं की बिजाई
कैथल जिले में रामगढ़ पाड़वा में 30, मटौर 30 और कलायत में 200 एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई नहीं हुई है। 260 एकड़ खेतों में अभी तक पानी का ठहराव है।
रोहतक: 10-15 दिन और लगेंगे खेतों से पानी निकालने में
रोहतक जिले के लाखन माजरा, महम व रोहतक ब्लॉक में सबसे अधिक समस्या है। पंप से पानी निकालने के बाद भी पूरा पानी अब तक नहीं निकाला जा सका है। कई जगह देरी से पानी निकलने के कारण भी किसानों को नुकसान हुआ है। अनुमान है अभी पानी निकलने में 10 से 15 दिन का समय और लगेगा। कई स्थानों पर इसके चलते गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी और कई किसानों की कपास की फसल पर प्रभाव पड़ा है।
जींद: कपास-धान की फसल हुई खराब
जुलाना क्षेत्र के छह गांवों के 272 एकड़ में अब भी बरसाती पानी जमा है। इस क्षेत्र में गेहूं की बिजाई नहीं हो पाई है। प्रशासन ने पानी निकालने के लिए पंप लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद पानी नहीं निकला। इस समय पानी तो निकल गया है, लेकिन गेहूं की बिजाई नहीं होने से किसानों को भारी का नुकसान हुआ है। जिले में 500 एकड़ में कपास तथा धान की फसल भी इस वर्ष खराब हुई है।
झज्जर: सात से आठ हजार हेक्टेयर भूमि बनी दलदली
जिले में करीब सात से आठ हजार हेक्टेयर भूमि दलदली बनी हुई है। इस जमीन का पानी नहीं निकल सकेगा, जबकि तीन हजार हेक्टेयर से पानी निकलवाने के लिए पंप सेट लगाए गए हैं। इस बार गेहूं की बिजाई का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 16 हजार हेक्टेयर घट गया है।
सेम से प्रभावित भूमि
जिला प्रभावित जमीन (एकड़ में)
- भिवानी 20000
- फतेहाबाद 11000
- रोहतक 6500
- हिसार 3396
- झज्जर 3000
- जींद 500
- यमुनानगर 405
- सोनीपत 355
- कैथल 260
- अंबाला 80