फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: नीरज के नक्शे कदम पर युवा, कच्ची उम्र में निशाने पर गोल्ड

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। दर्द कहां तक पाला जाए, युद्ध कहां तक टाला जाए, तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए...। कवि वाहिद अली की ये लाइनें ओलंपियन नीरज चोपड़ा और उनको देख जेवलिन संभालने वाले युवाओं पर सटीक बैठती हैं। नीरज चोपड़ा टोक्यो ओलंपिक के बाद अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक पर निशाना साधे हुए हैं। इधर नई पीढ़ी भी उनके नक्शेकदम पर जेवलिन थ्रो में भविष्य की तलाश कर रही है।
विज्ञापन


सोमवार को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस है। वैसे तो भाला पुराने समय से युद्धों में प्रयोग में लाया जाता था। अब युवा भाला फेंक स्पर्धा में पदक झटकने के साथ खुद के साथ देश का नाम रोशन कर रहे हैं। देश ही नहीं पूरे विश्व में जेवलिन शब्द आते ही नीरज चोपड़ा का नाम सामने आता है। नीरज टोक्यो ओलंपिक के बाद अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने को तैयारी कर रहे हैं। नीरज चोपड़ा के चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि हंगरी में वर्ल्ड चैंपियनशिप होनी है। नीरज जर्मनी में इसकी तैयारी कर रहे हैं। वे हर रोज सात से आठ घंटे अभ्यास कर रहे हैं। पिछली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल आया था। इस बार मेडल को सुनहरा बनाना है।
डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल कॉलोनी एथलेटिक्स नर्सरी के कोच हरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पास एथलेटिक्स के 25 बच्चे हैं। इनमें सात-आठ बच्चे जेवलिन थ्रो के हैं। अकेले नीरज चोपड़ा के गांव खंडरा से चार बच्चे जेवलिन थ्रो में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनमें युवराज, विनय और दीपिका का अच्छा प्रदर्शन है। इसके अलावा पानीपत से दक्ष नाम के युवक का भी जेवलिन थ्रो में उल्लेखनीय प्रदर्शन है। करनाल में रविवार को आयोजित द्वितीय नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप में उनका अच्छा प्रदर्शन रहा है।
विज्ञापन

युवराज ने बताया कि वह 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं। वह नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हें देखकर ही जेवलिन संभाला है। करनाल में आयोजित चैंपियनशिप में 53 मीटर जेवलिन थ्रो किया। उनका लक्ष्य नीरज चोपड़ा की तरह देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वह इसके लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
खंडरा गांव निवासी विनय ने बताया कि वह 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं। वह जेवलिन गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को आदर्श मानते हैं। उनके पदक जीतने के बाद से वह प्रैक्टिस कर रह हैं। पहले वह 49 मीटर तक थ्रो करते थे। अब उनका थ्रो 51 मीटर पर पहुंच गया है। कहा कि सीनियर मुकाबले तक वह काफी हद तक सुधार कर लेंगे।
असंध रोड पानीपत निवासी दक्ष 10वीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। उनका जेवलिन थ्रो 43 मीटर है। वह लगातार मेहनत कर अपनी थ्रो को बढ़ा रहे हैं। पहले यह 30 से 35 मीटर तक थी। अब इसमें सुधार हो रहा है।
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को पानीपत के खंडरा गांव में हुआ। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई पानीपत में ही हुई। चंडीगढ़ में एक बीबीए कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। पिता सतीश कुमार किसान हैं और मां सरोज देवी गृहिणी हैं। वे चाचा, ताऊ के 10 भाई-बहन हैं। चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि नीरज का 13 साल की उम्र में 80 किलोग्राम वजन था। उन्होंने वजन कम करने के लिए प्रैक्टिस शुरू कराई। उनका दौड़ में मन नहीं लगता था। वे जेवलिन थ्रो करने लगे। बिंझौल निवासी जयवीर उर्फ मोनू ने उन्हें जेवलिन में राह दिखाई। जयवीर जेवलिन में राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता हैं और वे अब एनआईएस पटियाला में कोच हैं। नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर जेवलिन थ्रो कर पहली बार देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में 88.06 मीटर थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता था। वे एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। 2018 में एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद नीरज कंधे की चोट का शिकार हो गए। इंडियन ग्रांड प्रिक्स में अपना ही रिकार्ड तोड़ते हुए 88.07 मीटर का थ्रो कर उन्होंने नया नेशनल रिकाॅर्ड बनाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें