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Panipat News: महिला जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी

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पानीपत। ऐतिहासिक नगरी पानीपत का राजनीतिक इतिहास महिला जनप्रतिनिधियों से परे रहा है। पानीपत की शहरी विधानसभा सीट का इतिहास 72 साल, समालखा विधानसभा सीट का इतिहास 58 व पानीपत ग्रामीण व इसराना विधानसभा सीट का इतिहास 15 साल पुराना है। यह दोनों सीटें 2009 में अस्तित्व में आई थी। पानीपत की चारों विधानसभा सीटों से आज तक दो महिला ही विधायक बन पाई है।
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उल्लेखनीय है कि पानीपत शहरी विधानसभा सीट से 2014 में पहली बार रोहिता रेवड़ी ने कांग्रेस के बुल्लेशाह को हराया था। वह इस सीट पर 62 साल में विधायक बनने वाली पहली महिला थीं। 2009 से पहले पानीपत में नौल्था विधानसभा सीट थी। इस सीट पर 1982 व 2005 में कांग्रेस की प्रसन्नी विधायक बनी थीं। पानीपत का वर्तमान स्वरूप चार विधानसभा सीटों से बनता है। पानीपत शहर, पानीपत ग्रामीण, इसराना और समालखा विधानसभा सीट। आजादी के बाद वर्ष 1952 से हुए हर विधानसभा चुनाव में पानीपत ने प्रतिनिधित्व किया। संयुक्त पंजाब में तीन बार वर्ष 1952, 1957 और 1962 में पानीपत विधानसभा के लिए चुनाव हुए। हरियाणा बनने के बाद समालखा विधानसभा का उदय हुआ और वर्ष 2007 में परिसीमन होने के बाद पानीपत ग्रामीण और इसराना विधानसभा अस्तित्व में आए। वर्ष 2009 के चुनाव में पानीपत ग्रामीण से ओम प्रकाश जैन और इसराना से कृष्णलाल पंवार विधायक बने।

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हरियाणा अलग होने के बाद बनी समालखा सीट



एक नवंबर, 1966 को पंजाब से हरियाणा के अलग होने के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में समालखा विधानसभा सीट बनी। वर्ष 1967 के पहले चुनाव में रणधीर कांग्रेस के प्रत्याशी के सिंह को हराकर पहला विधायक बने। समालखा में अब तक 14 विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन यहां भी महिला सफल नहीं रहीं। 2014 में इनेलो ने रामभतेरी को मैदान में उतारा है। रामभतेरी को भी हार का सामना करना पड़ा।
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यहां से डॉ. परमानंद कांग्रेस से दो बाद विधायक चुने गए। वहीं भाजपा से जुड़े फतेह चंद विज पांच बार, कांग्रेस से हुकूमत राय एक और उनके बेटे बलबीर पाल शाह पांच बार विधायक बने। वर्ष 1996 के चुनाव में निर्दलीय ओम प्रकाश जैन ने बड़ा उलटफेर करते हुए बलबीर पाल शाह को हराकर पहली बार जीत दर्ज की। इसके बाद से लगातार तीन बार से बलबीर पाल शाह यहां से जीते। 2014 में यहां से रोहिता रेवड़ी व 2029 में प्रमोद विज विधायक बने। 16 विधानसभा चुनाव में यहां एक बार ही महिला विधायक बनी हैं।



वर्ष 2009 में पानीपत ग्रामीण से पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान की पत्नी बिमला कादियान को इनेलो से टिकट मिली, लेकिन वह निर्दलीय ओम प्रकाश जैन से चुनाव नहीं जीत सकीं। इसके बाद पार्टियों ने इस सीट पर महिलाओं को टिकट भी नहीं दिया। 2009 व 2014 में इसराना सीट से कृष्णलाल पंवार व 2019 में बलबीर वाल्मीकि विधायक बने।
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2009 से पहले इसराना व पानीपत ग्रामीण का कुछ क्षेत्र नौल्था विधानसभा में था। नौल्था विधानसभा से दो बार कांग्रेस की प्रसन्नी विधायक बनी है।
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