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Haryana: HSVP के मुख्य प्रशासक पंचकूला, प्रशासक रोहतक और ईओ पानीपत की गिरफ्तारी का वारंट जारी

Fri, 16 Jun 2023 01:05 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)

सार

जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के बावजूद घरौंडा निवासी एक व्यक्ति को छह वर्ष बाद भी प्लॉट नहीं दिया गया। 15 नवंबर 2017 को उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए प्लॉट देने का आदेश दिया था। घरौंडा निवासी दिनेश कुमार के पिता का पानीपत सेक्टर-7 में प्लॉट अलॉट हुआ था।
 
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हरियाणा के पानीपत में जिला उपभोक्ता आयोग पानीपत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक, प्रशासक रोहतक और एस्टेट ऑफिसर पानीपत के गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यह आदेश आयोग ने घरौंडा के एक व्यक्ति को आदेशों के छह वर्ष बाद भी प्लॉट न देने पर दिए हैं। व्यक्ति को 2003 में प्लॉट अलॉट किया गया था।

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मगर बाद में उसे रिकाॅर्ड से हटा दिया गया। था। एचएसवीपी ने अब आनन-फानन वीरवार को विकल्प के तौर पर प्लॉट का ड्रा निकालकर संबंधित व्यक्ति को दे दिया है। परिवार को प्लॉट के लिए 20 वर्ष तक लड़ाई लड़नी पड़ी।

जिला उपभोक्ता आयोग ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। आयोग ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्राधिकरण को प्लॉट देने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्राधिकरण को कई बार याद भी दिलाया, लेकिन आयोग के फैसले की अनदेखी की गई। उन्होंने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक पंचकूला, प्रशासक रोहतक और ईओ पानीपत की गिरफ्तारी के वारंट जारी किए हैं। आयोग ने साथ ही कहा कि इस तरह से आदेशों का पालना न करना गलत है। इस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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पिता की मौत के बाद बेटे ने लड़ी लड़ाई
करनाल के घरौंडा निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि उसके पिता ने पानीपत के सेक्टर-7 में प्लॉट के लिए आवेदन किया था। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने 2003 में सेक्टर-7 में प्लॉट जारी किया था। उसने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने उनके प्लॉट को रिकॉर्ड से हटा दिया। उन्होंने अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। उनके पिता ने जिला उपभोक्ता कोर्ट में शिकायत दी। दिनेश ने बताया कि इस बीच उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उसने अपने प्लॉट की लड़ाई लड़ी। जिसमें आज सफलता मिली है।

क्या था मामला
जिला उपभोक्ता कोर्ट ने दिनेश कुमार के पिता की शिकायत पर प्लॉट के मामले में दोनों पक्षों की दलील सुनी। दिनेश कुमार की तरफ से एडवोकेट राजेश धौंचक ने पूरी बात रखी। उपभोक्ता कोर्ट ने 15 नवंबर 2017 को इसमें फैसला दिया। कोर्ट ने एचएसवीपी को दूसरा प्लॉट, हर्जाने में 11 हजार और मुकदमा खर्च में पांच हजार रुपये देने के आदेश दिए थे।

मैंने बुधवार को पानीपत में बतौर ईओ कार्यभार संभाला है। जिला उपभोक्ता कोर्ट के आदेश पर प्लॉट न देने का मामला जैसे ही मेरे संज्ञान में आया तो मैंने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। वीरवार को ड्राॅ निकाल कर वैकल्पिक प्लॉट दे दिया है। प्राधिकरण जल्द ही कोर्ट में इसके आदेशों की कॉपी जमा कराएगा। -विजय राठी, ईओ, एचएसवीपी पानीपत

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