सनौली। यमुना नदी का जलस्तर पिछले दस दिनसे खतरे के निशान से ऊपर है। नदी की तलहटी में पांच हजार एकड़ में किसानों ने सब्जी उगाई थी। यमुना के पानी ने इन फसलों को बर्बाद कर दिया है। किसानों ने सब्जियां व फसलों की गिरदावरी कराने की भी मांग की है । किसान सरकार से मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं। अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी किसानों की फसल को देखने नहीं पहुंचा है।
किसान शमशाद, कृष्ण, सुरेशपाल, मुनशाद , बलवान, राजपाल व महाबीर ने बताया कि किसानों ने यमुना की तलहटी में पांच हजार एकड़ में मिर्च, घीया, तोरई, टमाटर, मक्का व ज्वार लगाई थी। सब्जी पक चुकी थी। यमुना में आए पानी में पूरी फसल बर्बाद हो गई है। किसानों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बाढ़ से बर्बाद फसलों व सब्जियों के नुकसान के लिए पटवारी, तहसीलदार व सरकार से विशेष गिरदावरी करा मुआवजा की मांग की है ।
दस दिनों से यमुना नदी में लगातार चार दिनों तक चेतावनी स्तर के निशान पर बह रही यमुना नदी का जल स्तर जितनी तेज गति से बढ़ा था, उससे तेज गति से जल स्तर उतार गया हैं। यमुना का जल स्तर दो लाख से घट कर अब नाममात्र 60 हजार क्यूसेक रह गया हैं। इस संबंध में बापौली तहसील के कानूनगो नरेश कुमार का कहना है कि यमुना बांध के अंदर फसलों की गिरदावरी नहीं की गई हैं। बांध के अंदर की फसलों का मुआवजा नहीं दिया जाता हैं, इसलिए बांध के अंदर फसलों की गिरदावरी करने के लिए सरकार व विभाग की ओर से कोई आदेश नहीं हैं।
इन गांवों की फसलें हुईं तबाह
यमुना में आए उफान के कारण नदी से सटे गांव राणा माजरा, पत्थर गढ़, नवादा आर, नवादा पार, तामसाबाद, गढ़ी बेसिक, जलालपुर, तामशाबाद, सनौली खुर्द, रामड़ा आर, नन्हेडा, रिशपुर, अधमी, जलमाणा, गोयला खुर्द, मिर्जापुर, रहीमपुर खेड़ी, गोयला कलां, खोजकीपुर, राकसेड़ा, हथवाला आदि दर्जनों गांवों के किसानों की फसल बर्बाद हुई है।