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गर्भवतियों का करना है टीकाकरण, स्वास्थ्य विभाग के लिए बनीं चुनौती

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कोविड-19 रोधी टीका लगाने की जब शुरुआत हुई तो गर्भवती महिलाओं में इसके प्रभाव की सटीक जानकारी नहीं थी। एहतियात के तौर पर तब गर्भवतियों को टीकाकरण से दूर रखा गया। ऐसे में लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। उनके जहन में बैठ गया कि गर्भवतियों के लिए कोविड-19 का टीकाकरण प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, इसका नतीजा अब सामने आ रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 टीके को गर्भवतियों का सुरक्षा कवच बता रहा है, लेकिन गर्भवतियों का टीका करना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है। गर्भवतियों का टीकाकरण करने के दिशा-निर्देश जारी हुए सोमवार को एक महीना हो जाएगा, लेकिन जिले में अभी तक गर्भवतियों का टीका शुरू नहीं हो पा रहा है। गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए जागरूक करने को स्वास्थ्य विभाग ने अभियान भी शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य कर्मी घ-घर जाकर गर्भवतियों और उनके परिवार को टीकाकरण के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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गर्भवती महिलाओं में संक्रमण होने पर बढ़ जाती हैं जटिलताएं
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोविड-19 की जटिलता गर्भवती महिलाओं में बढ़ जाती है। खासतौर पर 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मोटापे, मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित महिलाओं को खतरा अधिक है। जिन महिलाओं में पहले से आंतचन की समस्या है, उनके लिए भी खतरा अधिक है। समय से पहले डिलिवरी हो सकती है। नवजात शिशु का वजन ढाई किलोग्राम से कम रह सकता है। कुछ परिस्थितियों में शिशु के जन्म से पहले मृत्यु तक हो सकती है।
गर्भवतियों का टीकाकरण करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल उनमें जागरूकता नहीं है। इस दिशा में स्वास्थ्य कर्मी गर्भवतियों और उनके परिवार को जागरूक कर रहे हैैं। जिले में सभी गर्भवतियों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
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-डॉ. मनीष पासी, नोडल अधिकारी, टीकाकरण
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