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Panipat News: एक रजिस्ट्री पर दर्ज किए दो इंतकाल, अब रुकी जमाबंदी

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पानीपत। तहसील में एक रजिस्ट्री पर दो इंतकाल दर्ज करने का मामला सामने आया है। इससे आवेदक की जमीन की जमाबंदी रुक गई है। आरोप है कि फर्जी की जमाबंदी कर दी गई, जबकि असल की रुक गई। तहसील अधिकारियों ने इसकी कोई जानकारी न होने की बात कही है।
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रमेश नगर निवासी अंशु नारंग ने सेवा अधिकार आयोग को इसकी शिकायत देते हुए आरोप लगाया कि 17 नवंबर 1986 को एक रजिस्ट्री की थी। उस पर एक इंतकाल दर्ज किया गया। उसी के आधार पर 2014 में फिर एक इंतकाल दर्ज कर दिया गया। इसके आधार पर फर्जी जमाबंदी कर दी गई। असल मालिक की जमाबंदी नहीं हो रही है। प्रथम अपीलीय अधिकारी डीएसपी मुख्यालय धर्मबीर खर्ब ने अंशु नारंग से सबूत लेकर जांच के लिए जिला राजस्व अधिकारी को भेजा है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके पिता अशोक कुमार ने 2009 में 28.5 वर्ग गज का एक प्लॉट लिया था। उसकी रजिस्ट्री कराकर इंतकाल दर्ज कराया। उनसे पिछले दो इंतकाल भी उनके पिता ने दर्ज करवाए थे। उस समय एक इंतकाल में 317.5 वर्ग गज जमीन थी। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने रजिस्ट्री के आधार पर इंतकाल दर्ज करा दिया। इस बार इंतकाल में जमीन 310.91 वर्ग गज कर दी। आरोप है कि 2015-16 में हुई जमाबंदी में एक इंतकाल में अशोक कुमार का नाम नहीं डाला गया, जबकि 2003-04 की जमाबंदी में उनके नाम से को-ऑपरेटिव बैंक में चार लाख का लोन भी जमाबंदी में दर्ज है। को-ऑपरेटिव बैंक के मैनेजर ने भी तहसीलदार को 2018 में लोन जमाबंदी से हटाने के लिए पत्र भी लिखा था।
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मौके पर जमीन कम है और जमाबंदी ज्यादा हो गई। 10-12 प्लॉट मालिक रजिस्ट्री में तो जमीन के मालिक हैं, लेकिन उनके नाम से जमाबंदी नहीं है। उन्होंने 2014 के राजस्व विभाग के पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार पर जानबूझकर इंतकाल दर्ज और मंजूर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, रिकॉर्ड में सही इंतकाल की जमाबंदी में दर्ज करने और फर्जी इंतकाल को खारिज करने की मांग की है।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच पड़ताल की जाएगी। जिसके बाद जो भी आवश्यक और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- वीरेंद्र गिल, तहसीलदार, पानीपत।
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