पानीपत। नगर निगम ने शहर की पेयजल सप्लाई के लिए 20 करोड़ का टेंडर खोल दिया है। इसकी तकनीकी बिड खुली है, जबकि फाइनेंशियल बिड और रेट नेगोसिएशन मुख्यालय स्तर पर होगा। बीस करोड़ के टेंडर की मंजूरी निगम अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। फाइनेंशियल बिड की मंजूरी के बाद ही टेंडर का वर्क ऑर्डर जारी हो सकता है। तब तक निगम अधिकारियों के साथ शहर के लोगों को भी इंतजार करना होगा।
उल्लेखनीय है कि पेयजल सप्लाई के इस टेंडर में निगम अधिकारियों ने पूरे छह महीने लगा दिए हैं। सबसे पहले मुख्यालय स्तर से इसे लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। जिस पर निगम अधिकारियों ने दिसंबर 2022 को एक टेंडर को दो भागों में बांट कर लगा दिया था। बाद में अपनी गलती का पता चला तो इसे कई माह तक खोला ही नहीं। बाद में इसे अप्रैल में खोल भी दिया लेकिन गलती सुधारने के लिए इसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फिर से एक ही भाग में टेंडर लगाया गया। पिछले कई माह से निगम अधिकारी शहरवासियों को अपने ठेकेदारों का काम बढ़ाकर पानी पिलाने का काम कर रहे हैं।
निगम अधिकारियों का कहना है कि इस टेंडर के अनुरूप निगम क्षेत्र की सभी करीब 300 कॉलोनियों और निगम के अधीन सेक्टरों को पेयजल सप्लाई देनी थी। इसके लिए 20 करोड़ का टेंडर 18 माह के लिए लगाया गया है। इसमें निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के 600 ट्यूबवेल का ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस शामिल है। कुल मिलाकर निगम क्षेत्र को पानी की सप्लाई करना और पूरी प्रक्रिया के रखरखाव का खर्च इस टेंडर में शामिल रहेगा। जिसका खर्च हर माह 1.11 करोड़ रुपये बनता है। जब तक टेंडर नहीं खुलता और वर्क ऑर्डर जारी नहीं होता तब तक विभागीय अनुमति पर पुराने रेटों पर ही काम होता रहेगा।
गौतरतलब है कि पहले जनस्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पेजयल सप्लाई के टेंडर पर अलग अलग काम करते थे लेकिन अब निगम क्षेत्र वाला जनस्वास्थ्य विभाग नगर निगम में मर्ज हो चुका है। जिसमें ट्यूबवेल, पाइपलाइन भी शामिल हैं।
वर्जन:
मुख्यालय स्तर से मिलेगी फाइनेंशियल अनुमति
टेंडर बीस करोड़ का खुल गया है। अब इसकी फाइनेंशियल अनुमति मुख्यालय स्तर से मिलेगी। अब अनुमति मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
राकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग।