पानीपत। पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्र में 2024 का चुनाव काफी रोचक बन गया है। कांग्रेस के वरिंदर शाह और भाजपा के प्रमोद विज के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। यहां निर्दलीय पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी पूरा जोर लगा रही हैं। एक दूसरे के बड़े वोट बैंक में सेंध लगाने में लगे हैं। ऐसे में पिछले दो बार से भाजपा की पक्की सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय बन रहा है।
भाजपा के प्रमोद विज जहां संगठन और अपने पिछले पांच साल के कामों को लेकर मैदान में हैं वहीं कांग्रेस के वरिंदर शाह अपने पिता हकूमत शाह के बाद शाह परिवार की राजनीतिक छवि और हुड्डा के नजदीकी होना बड़ा सहारा है। रोहिता रेवड़ी अपने 2014 के कार्यकाल के दौरान कामों को लेकर मैदान में हैं।
दिल्ली का द्वार कहे जाने वाला पानीपत पुराने समय में ही सिंहासन पाने को लेकर जंग की धरती कहा जाता है। दिल्ली को पाने के लिए पानीपत की धरती पर तीन बड़ी लड़ाई लड़ी गई। आजादी के बाद हैंडलूम नगरी के नाम से प्रख्यात हुई। पानीपत की चार विधानसभा क्षेत्रों में से पानीपत शहरी विधानसभा एक है। आजादी के बाद पाकिस्तान के कई जिलों से आकर बसे लोगों ने यहां आकर अपना काम धंधा शुरू किया। इनमें से आज दर्जनों बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित कर चुके हैं। देश ही नहीं कई बड़े देशों में पानीपत का उत्पाद पहचान बनाए हुए हैं। यहां का प्राचीन सिद्ध श्री देवी मंदिर आस्था का विशेष केंद्र है।
विधानसभा-2024 के आम चुनाव की बात करें तो भाजपा ने यहां से 2019 में विधानसभा पहुंचे प्रमोद विज पर भरोसा जताकर अपना पुन: चेहरा बनाया है। उनका शुरुआती दौर में टिकट जारी कर दिया था। कांग्रेस ने उनके सामने वरिष्ठ नेता वरिंदर शाह का आखिरी दिनों में टिकट तय किया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस में गईं पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी पानीपत शहर से टिकट की दावेदारी कर रही थीं। उन्होंने टिकट न मिलने पर कांग्रेस को छोड़ दिया और निर्दलीय मैदान में उतर गईं।
एडवोकेट राममोहन राय ने बताया कि पानीपत शहर में इस बार चुनाव अलग ही देखने को मिल रहा है। भाजपा प्रत्याशी पिछले विकास कार्यों और शहर के बड़े प्रस्तावित कामों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। हालांकि असंध रोड और गोहाना रोड फोरलेन के सिवाय कोई बड़ा प्रोजेक्ट धरातल पर मूर्त रूप में नहीं मिला है। यहां आधुनिक दमकल केंद्र और हाली पार्क व झील को पर्यटन स्थल बनने का आज भी इंतजार है। सेक्टर-12 निवासी अशोक गर्ग और सेक्टर-18 निवासी एडवोकेट अमित राठी ने बताया कि शहरी सीट पर चुनाव अलग ही नजर आ रहा है। कांग्रेस के वरिंदर शाह और रोहिता रेवड़ी अपनी योजनाओं को लेकर आगे आ रहे हैं। वे प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र, औद्योगिक इकाइयों के लिए बड़े प्रोजेक्ट व आधुनिक दमकल केंद्र का न मिल पाना समेत कई विषयों को मुद्दा बनाकर चल रहे हैं।
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तीन चुनाव जीत के हर बार बदले चेहरे
शहरी विस क्षेत्र में पिछले तीनों चुनावों की बात करें तो हर चुनाव में चेहरा बदला गया है। बलबीर पाल ने 2009 में भाजपा के संजय भाटिया को 12159 वोटों से हराया था। बलबीर पाल शाह को 36294 वोट मिले थे। वहीं संजय भाटिया को 24135 वोट मिले थे। भाजपा ने 2014 में रोहिता रेवड़ी को मैदान में उतारा। रोहिता रेवड़ी ने 53721 वोटों से जीत दर्ज की। उन्होंने 92757 वोट मिले थे। उनके सामने कांग्रेस के वरिंदर शाह को 39036 वोट मिले थे। भाजपा ने 2019 के चुनाव में प्रमोद विज को मैदान में उतारा। उन्होंने 39545 वोटों से जीत दर्ज की थी। प्रमोद विज को 76863 वोट मिले थे। उनके सामने कांग्रेस के संजय अग्रवाल को 37318 वोट मिले थे।
अरोड़ा खत्री के साथ महाजन और मुस्लिम वोटर भी मजबूत
पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक अरोड़ा खत्री मतदाता हैं। इनकी संख्या करीब 76 हजार है। इनके साथ बनिया, महाजन व मुस्लिम वोटर भी पर्याप्त संख्या में हैं। यहां करीब 19 हजार महाजन और 12 हजार मुस्लिम वोटर हैं। करीब 9500 सिख और करीब इतने ही वाल्मीकि और 13500 वोटर बीसी वर्ग के हैं। यहां जाट वोट करीब 5500 हैं।