सनौली। बाढ़ बचाओ प्रबंधन के तहत इस बार यमुना में करीब 15 करोड़ की लागत से पत्थरों की 12 पुरानी व 12 नई ठोकरें लगाई जानी थीं, लेकिन पत्थरों की कमी के चलते सभी ठोकरें नहीं लग पाई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने यमुना के पानी द्वारा भूमि कटाव को रोकने को लेकर पत्थरों की एक ठोकर के स्थान पर मिट्टी के कट्टों के करीब चार स्टड लगाने का फैसला लिया। उसी के तहत अब विभाग के अधिकारियों की टीम द्वारा करीब 150 मजदूरों के साथ मिट्टी के कट्टों की स्टड लगाई जा रही है। रविवार तक मिट्टी के कट्टों की करीब 110 स्टड लगाई जा चुकी है
उल्लेखनीय है कि पत्थरों की कमी के कारण सिंचाई विभाग को जहां पत्थरों की ठोकरें लगानी थी, उनके स्थान पर अस्थाई रूप से मिट्टी के कट्टों के स्टड बनवा दिए गए हैं। एक ठोकर के स्थान पर कट्टों की करीब चार स्टड बनाई गई है और दावा किया गया है कि यमुना में अस्थाई रूप से मिट्टी के कट्टों की करीब 110 स्टड बनाई जा चुकी है। मिर्जापुर व राणा माजरा में जहां पर यमुना के पानी द्वारा भूमि कटाव का ज्यादा खतरा है, वहां पर मिट्टी के कट्टों को लोहे के तारों में बांधकर मजबूती की गई है ताकि पानी के बहाव में मिट्टी के कट्टे बह न जाए।
दावा है कि बाढ़ बचाओ प्रबंध के तहत जिला में सभी प्रबंध पूरे कर लिए गए है। वहीं दूसरी तरफ पहले पत्थरों की कमी चल रही थी लेकिन अब पिछले कई दिनों से गांव राणा माजरा व मिर्जापुर सहित अन्य कई स्थानों पर अब पत्थरों की करीब 100 गाडि़यां आ चुकी है।
वर्जन-
पत्थरों की नहीं लग पाई ठोकरें
गांव तामशाबाद के सरपंच प्रतिनिधि गोविंद शर्मा ने कहा कि उनके गांव में सात-आठ सालों से पत्थरों की कोई भी ठोकरें नहीं लग पाई है। जबकि 1975 व 1978 में इसी गांव में तटबंध टूटने से भयंकर बाढ़ आई थी। इस साल पत्थरों की ठोकरें लगने की उम्मीद थी पर किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं लिया।
वर्जन-
पत्थरों की जगह लगाई जा रही मिट्टी के कट्टों की स्टड
सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी ने बताया कि जहां पर पत्थरों की ठोकरें लगनी थी, वहां पर मिट्टी के कट्टों की स्टड लगाई जा रही है। यमुना में अब तक विभिन्न गांवों में करीब 110 स्टड लग चुकी है। गांव तामशाबाद में ठोकरें लगाने का टेंडर किसी ठेकेदार नहीं लिया।