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Panipat News: तीन बाल श्रमिकाें को किया रेस्कयू, भेजा बाल देखभाल गृह

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पानीपत। जाटल रोड पर ढाबों पर काम कर रहे तीन बच्चों को एमडीडी ऑफ इंडिया की टीम ने मानव तस्करी विरोधी इकाई के सहयोग से रेस्कयू कर बाल कल्याण समिति में पेश किया। यहां से इन सभी तीन बच्चों की काउंसलिंग की गई और उसके बाद बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों को बाल देखभाल गृह में भेज दिया गया। गौरतलब है कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन के तत्वावधान में काम कर रही एमडीडी ऑफ इंडिया न्याय तक पहुंच कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे बचपन बचाओ आंदोलन के तहत जिला बाल श्रम के खिलाफ रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
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इस कार्रवाई में मानव तस्करी विरोधी इकाई से एसआई पवन कुमार, हैड कांस्टेबल रविंद्र कुमार, एमडीडी ऑफ़ इंडिया संस्था से अजय चौहान और संजय कुमार मौजूद रहे। एमडीडी ऑफ इंडिया से जिला संयोजक संजय कुमार ने बताया कि बाल श्रम एक कानूनन अपराध है और जो कोई भी बच्चों से बाल श्रम करवाता है उसे सजा के साथ जुर्माना भी हो सकता है। सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत स्कूली शिक्षा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। बाल श्रम से जुड़े अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 370-374 में सजा का प्रावधान है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के बच्चे को किसी कारखाने या खान में काम नहीं कराया जा सकता। अगर कोई व्यक्ति 14 साल से कम उम्र या 14 से 18 साल के बीच के बच्चे को किसी खतरनाक काम में लगाता है, तो उसे एक से छह महीने की जेल हो सकती है या 20,000 से 50,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। बाल श्रम उन्मूलन के लिए भारत सरकार कई तरह के सरकारी कार्यक्रम चलाती है। अगर किसी को भी बाल श्रम का कोई मामला दिखे तो उसको तुरंत श्रम विभाग, मानव तस्करी विरोधी इकाई, बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन या गैर सरकारी संस्थाओं को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
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