पानीपत। निर्जला एकादशी पर इस बार तीन शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग दिनभर रहकर रात 9:39 बजे तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग लग जाएगा। इसके साथ ही दोपहर में 3:56 से अगले दिन सुबह 5:24 बजे तक त्रिपुष्कर योग है। ज्योतिषाचार्य डाॅ. रामराज कौशिक ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार 17 जून को सुबह 4:45 बजे ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी। इसका समापन 18 जून को सुबह 6:20 बजे इसका समापन होगा।
उदयातिथि के अनुसार इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को माना गया है। शहर समेत गांवों में 17 और 18 को दोनों दिन पानी की छबील लगाने के साथ तरबूज व अन्य खाद्य पदार्थों की सेवा की जाएगी। एकादशी के दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। कहते हैं कि एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को बैकुंठ में स्थान मिलता है। ज्येष्ठ माह में आने वाली निर्जला एकादशी का महत्व सबसे अधिक माना गया है। यह व्रत भीषण गर्मी में आता है और ऐसे में यदि पानी का दान किया जाए तो सबसे बड़ा पुण्य होता है। इस दिन व्रत रखने वाला जातक स्वयं पानी नहीं पीता, लेकिन राहगीरों को पानी अवश्य पिलाता है। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी पानी का इंतजाम करना पुण्य होता है। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं। निर्जला एकादशी के दिन पूजन करने के साथ-साथ एकादशी व्रत कथा अवश्य सुननी या फिर पढ़नी चाहिए। इससे आपकी पूजा पूर्ण होती है।
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पानी का घड़ा करें दान और लगाएं पौधे
ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि इस दिन साधक निर्जला व्रत रखकर किसी को पानी पीने का घड़ा दान करता है तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन पौधे लगाना शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन पीपल, बरगद, नीम का पेड़ अवश्य लगाएं। निर्जला एकादशी के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन नमक खाने से एकादशी व्रत और वीरवार के फल नष्ट हो जाते हैं। इस दिन तुलसी को न स्पर्श करना चाहिए और न ही उसमें जल चढ़ाना चाहिए। क्योंकि इस दिन मां तुलसी व्रत रखती हैं। इस दिन बेड और पलंग की बजाय जमीन में सोना चाहिए। इस दिन झाडू पोंछा करने की मनाही है। क्योंकि इससे चींटी सहित कई सूक्ष्म जीवों की हत्या का दोष लग जाता है।