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ये पानीपत है जनाब, यहां रात 12 बजे के बाद दवा मिले न मिले लेकिन दारू जरूर मिलेगी

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पानीपत। किसी ने ठीक ही कहा कि ये पानीपत है जनाब ! यहां रात 12 बजे के बाद किसी जरूरतमंद को दवा मिले न मिले लेकिन दारू जरूर मिलेगी। बिल्कुल यही हाल शहर में शराब कारोबारियों का है। शहर में ज्यादातर ठेकों पर रात को 12 बजे के बाद भी शराब की बिक्री होती है। शहर के अंदर का पॉश एरिया मॉडल टाउन हो या जीटी रोड या फिर शहर के ऑउटर रास्तों पर खुले ठेके हों। ये आपको 12 बजे के बाद भी खुले दिखाई देंगे।
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खास बात ये है कि कई बार नियमों को बनाए रखने के लिए इनको 12 बजे के बाद बंद तो कर दिया जाता है लेकिन इनके शटरों को काट एक छोटी से खिड़की ऐसी बना दी जाती है जिसमें से पैसे आराम से लिए जा सकें और शराब की बोतल पकड़ाई जा सके। इन शराब ठेकेदारों समेत खरीदारों को भी नियम कानूनों की चिंता नहीं है। वहीं रात को सुरक्षा के प्रहरी भी इनसे अनजान हैं। भले ही शहर के जीटी रोड और अन्य रास्तों पर पुलिस गश्त करती हो, साथ में पुलिस चौकी या थाना हो लेकिन पुलिस वाले भी इनको रोकने टोकने से परहेज करते हैं।
इसे लेकर अमर उजाला टीम ने रात को शहर के शराब के ठेकों का लाइव किया। सबसे पहले टीम टोल प्लाजा पहुंची। 12 बजे के बाद शराब ठेके खुले मिलेे। जब बंद हुए तो शराब की बिक्री शटर की छोटी खिड़की से होती दिखाई दी। हैरानी की बात ये है कि यहां पुलिस पेट्रोलिंग लगातार होती रही। इन सभी से करीब 100 से 200 मीटर दूरी पर एक पुलिस सहायता केंद्र और पुलिस चौकी भी मिली लेकिन इनके गेट बंद मिले। रात भर शराब के खरीदार ठेकों पर खड़े नजर आए और बिक्री चालू रही। दूसरी ओर कुछ लोग तो ऐसे भी थे जो यहां से शराब खरीदकर गांव में चुनाव का माहौल बदलने की कोशिश कर रहे थे। उनको न सुरक्षा करने वालों की चिंता थी और न आचार संहिता से कोई मतलब था।
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दवाओं की दुकान बंद लेकिन शराब की खुली
जीटी रोड पर दवाओं की एक भी दुकान खुली नजर नहीं आई। बस स्टैंड, संजय चौक, गोहाना रोड, असंध रोड पर बनी मुख्य सभी दवाओं की दुकानें बंद थी लेकिन शराब की दुकानें खुली थी। पहले शराब के ठेके खुलने का समय रात 11 बजे तक किया गया था लेकिन बाद में सरकार ने इसे बढ़ाकर 12 बजे कर दिया था। इसके बाद भी शराब के खरीदार इतने हैं कि रात को एक बजे भी ठेके का शटर खड़का देते हैं।
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