पानीपत। स्वच्छ सर्वेक्षण के 3000 अंकों वाले सर्विस लेवल प्रोग्रेस में साल में तीन क्वार्टर चले। इनमें पहले क्वार्टर में निगम को सिर्फ 190 अंक मिले, दूसरे में 288 अंक मिले। तीसरे क्वार्टर में निगम को 1125 अंक मिले हैं। दूसरी ओर 2250 अंकों के सर्टिफिकेशन में निगम को ओडीएफ के तो 600 अंक मिले लेकिन जीएफसी में शून्य मिला।
इसके अलावा सिटीजन वॉयस में शहरवासियों की आवाज ने निगम को 2250 में से 1721 अंक दिलाए। भले ही निगम ने यूएलबी लेवल 3926 अंकों के साथ 127 वां रैंक प्राप्त किया हो लेकिन अगर बात राज्य स्तर की जाए तो ये अंक एवरेज बनाते हुए 2781 बनते हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर ये एवरेज के हिसाब से 2618 हैं।
पानीपत नगर निगम कागजों में ओडीएफ प्लस प्लस घोषित किया है। लेकिन यहां के शौचालयों के हालात सबसे खस्ता हैं। निगम के गंदे शौचालयों की वजह से निगम ओडीएफ प्लस प्लस की सुविधाओं पर खरा नहीं उतर पाया। जो कागजात निगम की ओर से प्रतिस्पर्धा के लिए आवेदन किए गए थे, धरातल पर उनकी सच्चाई विपरीत निकली। जिसकी वजह से निगम को अच्छी रैंकिंग से हाथ धोना पड़ा।
सफाई मित्रा सुरक्षा चैलेंज में पानीपत पीछे छूट गया है। इस प्रतिस्पर्धा में प्रदेश में केवल गुरुग्राम और रोहतक का ही चयन हो पाया है। माना जा रहा है कि नगर निगम ने इसकी तैयारियां काफी देरी से शुरू की थी। इस अभियान के अनुरूप तैयारी न होने के कारण पानीपत को इससे बाहर रखा गया।
सर्वेक्षण में जीएफसी चरण में निगम को शून्य मिला है। जीएफसी से तात्पर्य गारबेज फ्री सिटी यानी कूड़ा मुक्त शहर से होता है। इसमेेें निगम को जीरो अंक मिले हैं। बताया जा रहा है कि निगम इस प्रतिस्पर्धा में जीएफसी के लिए आवेदन तक नहीं कर पाया था। इसके लिए निगम के पास आवश्यक दस्तावेज तक पूरे नहीं थे।
सर्वेक्षण में 2250 अंक के सिटीजन वायस चरण में ही निगम को सबसे बेहतर 1721 अंक मिले हैं। इसमें शहरवासियों को कॉल, वेबसाइट पर प्रतिक्रिया और स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम के सवालों के जवाब देने होते हैं। शहरवासियों की आवाज के फीडबैक के बदौलत ही शहर इस चरण में कुछ हद तक कामयाबी पा सका है।