जैन स्थानक में प्रवचन सुनते श्रावक। संवाद
- फोटो : udhampur news
समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने शरीर को भव सागर तैरने की एक नांव बताया। उन्होंने कहा कि संसार का यह अनंत चक्र, जन्म-मरण का सिलसिला है। इसे अक्सर दुखों और भ्रमों से भरा समुद्र माना गया है। शरीर एक नाव है, यह दर्शाता है कि यह मानव शरीर एक साधन है। जिससे हम इस संसार-सागर को पार कर सकते हैं। जिस प्रकार कोई नाविक नाव के माध्यम से समुद्र को पार करता है। उसी प्रकार यह शरीर साधना, ज्ञान, विवेक, और आत्मचिंतन से संसार रूपी सागर से पार उतरने का उपकरण है, लेकिन यदि हम इस नाव का सही उपयोग नहीं करते, तो यह डूब सकती है। संवाद
जैन स्थानक में प्रवचन सुनते श्रावक। संवाद- फोटो : udhampur news