पानीपत। पोर्टल में तकनीकी खामी होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के पास लिंगानुपात तीन माह का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। है। सिविल सर्जन तीन माह से ये डाटा मैन्युअली जुटा रहे हैं। काम की अधिकता के कारण यह रिपोर्ट भी तैयार नहीं हो रही है। यह दिक्कत प्रदेश के सभी जिलों में आ रही है। रिपोर्ट न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात के अनुसार काम भी नहीं कर पा रहा है। इसलिए पिछले करीब दो साल से जिले में पीएनडीटी का नाममात्र ही काम हुआ है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग पिछले चार साल में जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने तक ही सीमित रहा लेकिन कार्यक्रम आयोजित नहीं कर पाया। पानीपत के 61 गांव ऐसे हैं जहां लिंगानुपात 700 से भी कम है। सबसे चिंताजनक स्थिति कवी, उझा, सींक, उग्राखेड़ी , मतलौडा, अहर सामुदायिक केंद्र के अंतर्गत आने वाले गांवों की है। यहां छह छह गांवों का लिंगानुपात 700 से भी कम है।
2015 से 2020 के बीच स्वास्थ्य विभाग ने भ्रूण जांच के करीब 80 मामलों में कई बड़े स्कैंडल का पर्दाफाश किया गया। 100 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई की गई । 2017 में पानीपत लिंगानुपात में 946 अंक के साथ पहले स्थान पर भी रहा था। 2020 के बाद पीएनडीटी इंचार्ज बदले। पिछले चार सालों में 15 साल से भी कम दबिश दी गई है। जागरूकता कार्यक्रम न के बराबर हुए। समय समय पर पीएनडीटी इंचार्ज बदलते रहे। ऐसे में लिंग जांच के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई।
पोर्टल न चलने से यह परेशानी बढ़ी-
- स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट के अनुसार यह देखता है जिले में किन किन गांवों में लिंगानुपात कम है, वहां लिंगानुपात के लिए जागरूकता कार्यक्रम करवाता है।
- जहां लिंगानुपात बेहतर होता है उन पंचायतों को सम्मानित किया जाता है।
- रिपोर्ट के अनुसार लिंगानुपात बढ़ाने के लिए प्लानिंग तैयार की जाती है।
- पीएनडीटी टीम को अलर्ट कर लिंग जांच के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।
रिश्वत लेने के आरोप में फंस चुके प्रभारी-
सात मार्च को तत्कालीन पीएनडीटी इंचार्ज डॉ. पवन व उनके क्लर्क नवीन दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में फंस चुके हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने बरसत रोड स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक को लिंग जांच के मामले में फंसाने की धमकी देकर दो लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने उनके बिचौलिये डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में डॉ. पवन को हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसके बाद पीएनडीटी का चार्ज डॉ. अभय वत्स को दिया गया।
पानीपत का साल दर साल लिंगानुपात
2015- 892
2016- 912
2017- 945
2018- 900
2019- 939
2020- 935
2021- 918
2022- 924
2023- 920
2024 जून तक- 885
लिंगानुपात बढ़ाने के लिए बेहतर कदम उठाएंगे : सिविल सर्जन
लिंगानुपात के पोर्टल में तकनीकी खामी है। इसलिए रिपोर्ट नहीं मिल रही है। रिपोर्ट मैन्युअली तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में लिंगानुपात बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। सरकार लिंगानुपात के प्रति गंभीरता से काम कर रही है। लिंग जांच करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। समय समय पर निजी अस्पतालों व आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण भी किया जाता है। कम लिंगानुपात वाले गांवों में नुक्कड़ नाटक भी किए जाएंगे।