पानीपत। विद्यार्थियों को जीवन कौशल सिखाने, इसकी अभिव्यक्ति व अपनाने के लिए उन्हें शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए स्कूल में विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों में निपुण बनाया जाएगा। इससे पहले विभाग की ओर से अध्यापकों को दक्ष बनाएगा ताकि अध्यापक विद्यार्थियों को आसानी से जीवन कौशल की शिक्षा दे सकें। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से 21 सेंचुरी स्किल नाम से कार्यक्रम चलाया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने इसके लिए मुंबई की मैजिक बस फाउंडेशन एनजीओ से अनुबंध किया है। फाउंडेशन के सदस्य जिले के शिक्षकों को जीवन कौशल विषय संबंधी प्रशिक्षण प्रदान करेंगेे। वे खंड स्तर पर प्रशिक्षण शिविर लगाकर अध्यापकों को इसका प्रशिक्षण देंगे। पानीपत खंड का पांच दिवसीय प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) सहित दो केंद्रों में दिया जाएगा। जिसके लिए तैयारी की जा रही हैं।
एक शिविर में 40 अध्यापकों को मिलेगा प्रशिक्षण
एक प्रशिक्षण शिविर में करीब 40 अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। फाउंडेशन के सदस्य अध्यापकों को शिविर के दौरान प्रशिक्षण देंगे। विभाग की माने तो यह बेहद महत्वाकांक्षी योजना व कार्यक्रम है जिससे विद्यार्थियों को जीवन कौशल शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि वे जीवन में किसी भी क्षेत्र व परिस्थिति में काम कर सकें। शुरुआती तौर पर यह कार्यक्रम छठी से आठवीं की कक्षाओं के अध्यापकों के लिए चलाया जाएगा।
इन गतिविधियों में होंगे दक्ष
कार्यक्रम के तहत अध्यापकों को कक्षा में छोटी-छोटी गतिविधियों करवाकर विद्यार्थियों की मानसिक व शारीरिक दक्षता पहचाने व उनका रुझान समझने के बारे बताया जाएगा। वहीं, हुनर व विभिन्न कौशल को निखार, मौजूदा वातावरण में उसकी अभिव्यक्ति, मुखरता व अपनाने के लिए प्रेरित करने का भी अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे विद्यार्थियों को इसके लिए प्रेरित कर सकें। प्रतिभागियों को तैयार मॉड्यूल आधारित विभिन्न गतिविधियां रोल प्ले, सिचुएशन कार्ड, कहानी इत्यादि से यूनिसेफ के बताए दस कौशल को बताया जाएगा। इसमें भावनाओं की समझ, अंतर वैयक्तिक संबंध, तनाव प्रबंधन, समस्या समाधान, निर्णय लेना आदि शामिल है
वर्जन
स्पर्धा के दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी शिक्षा ही उपयुक्त नहीं है। बल्कि इसके साथ विद्यार्थियों को कौशल परक शिक्षा दी जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से 21 सेंचुरी स्किल नाम से कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें अध्यापकों को विद्यार्थियों के कौशल पहचाने, उसे दिशा देखने, परखने व निखारने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- विजेंद्र नरवाल, प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पानीपत।