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प्रदेश के छह एथलीटर दिखाएंगे कॉमनवेल्थ बरमिंघम में दमखम

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पानीपत। हरियाणा से इस बार छह एथलेटिक्स खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में दमखम दिखाएंगे। टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो में पदक विजेता नीरज चोपड़ा और शिल्पा रानी कॉमनवेल्थ के लिए अभ्यास में जुटे हैं। नीरज, डिस्कस थ्रोसर सीमा पूनिया और गोला फेंक खिलाड़ी मनप्रीत के अलावा बाकी तीन खिलाड़ियों का यह पहला कॉमनवेल्थ गेम होगा। गोला फेंक में नेशनल रिकॉर्ड ब्रेकर मनप्रीत कौर पांच वर्ष बाद वापसी कर रही हैं और सीधे कॉमनवेल्थ गेम्स खेलेंगी।
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एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ हरियाणा के सचिव राजकुमार मिटान ने बताया कि हरियाणा के छह खिलाड़ियों से पूरे देश को पदक की उम्मीद है। इनमें से तीन खिलाड़ी का नेशनल रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि नीरज के अलावा सभी खिलाड़ी 27 जुलाई को बरमिंघम के लिए रवाना हो जाएंगे।
1. नीरज चोपड़ा, जेवलिन थ्रो, पानीपत
पानीपत के गांव खंडरा के रहने वाले सूबेदार नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स में सोने पर निशाना लगाएंगे। नीरज इस समय यूरोप में वर्ल्ड चैंपियनशिप के साथ कॉमनवेल्थ की तैयारी कर रहे हैं। 23 जुलाई को वर्ल्ड चैंपियनशिप खेलने के बाद नीरज का ध्यान कॉमनवेल्थ गेम्स पर रहेगा। वर्ष 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज ने स्वर्ण पदक जीता था। इसी के साथ 2020 के टोक्यो ओलंपिक में देश को एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण पदक दिलाया था। वह एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के साथ एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुके हैं। स्टॉकहोम डायमंड लीग-2022 में नीरज ने 89.30 मीटर भाला फेंक कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज का लक्ष्य 90 मीटर पार भाला फेंकने का रहने वाला है।
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2. मनप्रीत कौर, गोला फेंक, अंबाला
अंबाला के मनमीत नगर की निवासी गोला फेंक खिलाड़ी मनप्रीत कौर ने पांच वर्ष के बाद वापसी कर रही हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ क्वालिफाई किया है। मनप्रीत कौर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए पंजाब के पटियाला में तैयारी कर रही हैं। इंटर स्टेट सीनियर चैंपियनशिप मुकाबले में 18.06 मीटर दूर शाटपुट फेंककर नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था। नए कीर्तिमान के साथ मनप्रीत कौर ने जुलाई में इंग्लैंड में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और अगले साल होने वाले एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है। ओलंपियन मनप्रीत लंबे समय के बाद मैदान में वापसी की और नेशनल रिकार्ड भी बना दिया है। उनके पति कर्मजीत सिंह ने उन्हें प्रेरित किया और उन्हें कोचिंग दे रहे हैं। वर्ष 2017 में हुए एशियन ग्रांड प्रिक्स में मनप्रीत कौर ने 18.86 मीटर गोला फेंक स्वर्ण जीता था। वर्ष 2016 ओलंपिक रियो भी खेल चुकी हैं।
3. संदीप कुमार पूनिया, वॉकरेसर, महेंद्रगढ़
महेंद्रगढ़ में लगने वाले मेलों में 50 से 100 रुपये के इनाम की कुश्ती से अपना खेल शुरू करने वाले संदीप कुमार पूनिया अब कॉमनवेल्थ बरमिंघम में दम दिखाएंगे। संदीप अब कॉमनवेल्थ के लिए वॉकरेस की तैयारी कर रहे हैं। प्रतिदिन 35 से 40 किलोमीटर चलकर निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। सिर्फ सात वर्ष की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। घर में कोई रोजगार नहीं था, पशुपालन एवं खेती कर घर का गुजारा चला रहे थे। संदीप पुनिया ने बताया कि वह दिन में दो एकड़ जमीन ऊंट के जरिये जोत देते थे। फसल कटाई के समय भी वह परिवार की पूरी सहायता करते थे। 2020 टोक्यो ओलंपिक में भी संदीप ने भाग लिया था। जिसमें वह 23वें स्थान पर रहे थे। हाल ही में संदीप कुमार पुनिया ने 50 किलोमीटर और 20 किलोमीटर वॉकरेस में अपने नाम नेशनल रिकॉर्ड बनाया है।
4. सीमा पूनिया, डिस्कस थ्रो, सोनीपत
सोनीपत के गांव खेवड़ा की रहने वाली डिस्कस थ्रोअर सीमा पूनिया अंतिल भी इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दमखम दिखाएंगी। सीमा पूनिया का यह पांचवां कॉमनवेल्थ गेम है। इससे पहले 2006, 2014 और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीत चुकी है और 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी है। एशियन गेम्स में भी सीमा पूनिया 2014 में स्वर्ण और 2018 में कांस्य पदक जीता था। 2020 ओलंपिक में भी खेल चुकी हैं। सीमा पूनिया ने बताया कि उनकी तैयारी अच्छी चल रही है। उनका सर्वश्रेष्ठ डिस्कस थ्रो 63.72 है।
सीमा ने 2018 में ऐड़ी में दर्द के बावजूद एशियन चैंपियनशिप जकार्ता में कांस्य पदक जीता था। कॉमनवेल्थ के लिए रोजाना आठ घंटे पसीना बहा रही हैं।
5. अमित खत्री, वॉकरेसर, रोहतक
रोहतक के गांव समाइला के रहने वाले अमित खत्री ने मोटा होने के लिए वॉक रेस शुरू की थी। वॉक रेस ने उनका जीवन बदलकर दख दिया है। अमित खत्री कॉमनवेल्थ क्वालिफाई करने के बाद साई बंगलुरु में अभ्यास कर रहे हैं। 10 किलोमीटर वॉकरेस का उनका रिकार्ड 40 मिनट 28 सेकंड है। जिसे अब 39 मिनट करने के लिए वह पसीना बहा रहे हैं। अमित ने बताया कि वह काफी दुबले-पतले थे। अमित के पिता सुरेश कुमार बीएसएफ में थे। पिता ने ही गांव के ही एक लड़के साथ रेस वॉक के लिए भेजना शुरू किया था। धीरे-धीरे अमित रेस वॉक में ऐसे रम गए कि नेशनल में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। रिकॉर्ड ब्रेक करते चले गए।
6. शिल्पा रानी, जेवलिन थ्रोअर, जींद
जींद की रहने वाली शिल्पा रानी का भी कॉमनवेल्थ बरमिंघम के लिए चयन हुआ है। शिल्पा रानी ने 2018 में ही जेवलिन थामा था, जिसके बाद से नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं। 2018 से पहले शिल्पा रानी हैंडबॉल खेलती थीं, जिसमें सफलता नहीं मिलने पर भाला फेंकना शुरू किया। केवल चार साल जेवलिन थ्रो करने के बाद शिल्पा ने कॉमनवेल्थ के लिए क्वालिफाई किया। शिल्पा पटियाला में तैयारी कर रही हैं। शिल्पा का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 59 मीटर है। उनका कहना है कि पहली बार उन्हें कॉमनवेल्थ में खेलने का मौका मिला है, इसलिए अपनी पूरी ताकत झोंक दूंगी।
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