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श्रीराम ने ताड़का वन से खत्म किया ताड़का का आतंक

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पानीपत। सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन की ओर से आयोजित रामलीला के तीसरे दिन ताड़का वध की लीला हुई। इस मौके पर मंदिर के प्रधान तरुण गांधी ने रामायण का वर्णन करते हुए कहा कि रामलीला मंचन का एकमात्र मकसद लोगों को रामायण के बारे में अवगत कराना है ताकि भारतीय बच्चे और बड़े हमारी संस्कृति को समझें। जीवन में सभी श्री राम के चरित्र को अपनाएं। उन्होंने कहा कि ताड़का जो सुकेतु यक्ष की पुत्री थी, उसका विवाह सुड नामक राक्षस के साथ हुआ था। वह अयोध्या के समीप स्थित सुंदरवन में अपने पति और दो पुत्रों सुबाहु और मारीच के साथ रहती थी। उसके शरीर में हजार हाथियों का बल था। उसके प्रकोप से सुंदर वन का नाम ताड़का वन पड़ गया था। उसी वन में विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि-मुनि भी रहते थे। उनके जप, तप और यज्ञ में ये राक्षस हमेशा बाधाएं डालते थे। विश्वामित्र राजा दशरथ से अनुरोध कर राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन लाते हैं। राम ने ताड़का और विश्वामित्र के यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन सुबाहु का वध कर देते हैं। मारीच उनके बाण से आहत होकर दूर दक्षिण में समुद्र तट पर जा गिरता है। राम के स्वरूप में बलजीत, लक्ष्मण अनूप छाबड़ा, दशरथ नरेश शर्मा, विश्वामित्र मदन आजाद एवं ताड़का के स्वरूप में पप्पू नारंग रहे। रामलीला देखने मॉडल टाउन से इतना भारी जनसमूह आता है कि जगह कम पड़ जाती है। आयोजन में मंदिर के प्रधान तरुण गांधी, सचिव मनोहर लाल सेतिया, डायरेक्टर बंसीलाल नारंग, सतीश मित्तल, मोहित जग्गा, स्वाति मित्तल, मदन डूडेजा, बब्बू बिजली वाले, चंदा मॉडर्न टेंट, सरदार टिंकू, महेश डावर आदि का योगदान रहा।
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