पानीपत। नौ साल पहले आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्सटाइल नगरी से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी। इसमें बाद न सिर्फ हरियाणा बल्कि देश में इसे लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन नौ साल बाद भी पानीपत का लिंगानुपात सिर्फ 29 कदम चला है, यानी यह 892 से 920 पर पहुंच गया है, जबकि हरियाणा का लिंगानुपात 40 अंक बढ़कर 876 से 916 पर पहुंच गया है। यानी एक हजार लड़कों पर प्रदेश में लड़कियों का अनुपात 916 हो गया है।
हरियाणा में बढ़ते लिंगानुपात से चिंतित सरकार ने पानीपत को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए चुना था। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को अभियान की शुरुआत की थी। तब जिले का लिंगानुपात 892 था। इसके बाद महज दो साल बाद 2017 में 945 अंक के साथ पानीपत प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया था लेकिन इस स्थान पर काबिज नहीं रह पाया। अगले ही साल पानीपत का लिंगानुपात 45 अंक गिर गया और यह टॉप टेन से बाहर हो गया। 2023 में पानीपत का लिंगानुपात प्रदेश में 10 वें स्थान पर रहा है। अब नौ साल बाद देश के अन्य राज्यों संग प्रदेश के लिंगानुपात में भी सुधार आया है, लेकिन अपेक्षाकृत पानीपत में इसकी रफ्तार काफी सुस्त है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने नौ साल में 34 लिंग जांच के मामलों का भंडाफोड़ किया है। 42 आरोपियों को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया।
2023 में पलवल 946 लिंगानुपात के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है, जबकि 2022 में पलवल टॉप-10 से भी बाहर था। 2023 में रोहतक 883 अंक के साथ प्रदेश में सबसे निचले स्थान पर है। सीएम सिटी करनाल 908 अंक के साथ 13 वें और गृहमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अंबाला सिटी 919 अंक के साथ प्रदेश में 11 वें स्थान पर है।
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लावारिस मिलीं 28 बेटियां, चार की हो गई मौत
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत के नौ सालों में पानीपत में 28 बेटियों को लावारिस हालत में फेंक दिया गया। इनमें से चार की मौत हो गई। 24 बच्चियों को डॉक्टरों ने बचा लिया। अब ये बेटियां अनाथालय और शिशु घरों में पल रही हैं।
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साल दर साल प्रदेश का लिंगानुपात-
2015- 876
2016- 900
2017- 914
2018- 879
2019- 914
2020- 922
2021- 914
2022- 917
2023- 916
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पानीपत का साल दर साल लिंगानुपात-
2015- 892
2016- 912
2017- 945
2018- 900
2019- 939
2020- 935
2021- 918
2022- 924
2023- 920
लिंगानुपात बढ़ाने के लिए बेहतर कदम उठाएंगे : सिविल सर्जन
लिंगानुपात बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। इस साल कई जगह कार्रवाई भी की गई है। सरकार लिंगानुपात के प्रति गंभीरता से काम कर रही है। लिंग जांच करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। समय समय पर निजी अस्पतालों व आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण भी किया जाता है।
- डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन