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Panipat News: 25 साल से कर रहीं लड्डू गोपाल की सेवा

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शादी के बाद मेरा भी मन करता था कि घर में कान्हा लेकर आऊं। फिर मैंने अपने पति व परिवार वालों से बात की तो उन्होंने मेरी बात समझी। 25 साल पहले हरिद्वार से बाल स्वरूप कान्हा घर लेकर आई। तब से मैं और मेरा परिवार कान्हा की सेवा कर रहे हैं। कान्हा को हमने मंदिर में स्थापित कर रखा है। कान्हा की सेवा कर मन को खुशी मिलती है। ऐसा लगता है कि चिंता की कोई बात ही नहीं है क्योंकि कान्हा बैठे हैं। सुबह व शाम के समय कान्हा को भोग लगाया जाता है। दिन में उन्हें चाय, दूध का भोग लगाया जाता है। जन्माष्टमी पर उनके लिए विशेष भोग तैयार किया जाता है। माखन मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाया जाता है। ड्राई फ्रूट, चॉकलेट, टॉफी भी भोग में शामिल की जाती हैं। मैं कान्हा का जन्मदिन जन्माष्टमी पर ही मनाती हूं। उनके लिए नई ड्रेस लाई जाती है। पंचामृत से स्नान करवाया जाता है। झूला झुलाया जाता है। हर साल रक्षाबंधन पर कान्हा को राखी बांधती हूं। प्रत्येक त्योहार कान्हा के साथ मनाया जाता है। उन्हीं से दिन व त्योहार की शुरूआत है। जब भी मैं परेशान होती हूं तो उन्हें अपने मन की बात बताती हूं।
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- बबीता गर्ग, अंसल
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