पानीपत। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भक्तों ने मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। प्राचीन देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
मंदिरों सहित माता के दरबार को भव्य तरीके से सजाया गया है। शहर के ऐतिहासिक देवी मंदिर, श्री अवध धाम मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, प्रेम मंदिर, गीता मंदिर सहित शहर के विभिन्न मंदिरों में दिन भर मां के जयकारे गूंजते रहे। मंदिरों में भक्तों ने मां के दर्शन किए। मंदिरों में देवी के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना कर शाम को मंदिरों में भजन कीर्तन हुए।
प्राचीन देवी मंदिर के पुुजारी पं. शिवदत्त शुक्ला ने बताया कि देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। मंदिर के कपाट सुबह तीन बजे ही खोल दिए जाते हैं। इसके बाद माता स्नान कराकर सजाया जाता है। सजावट के लिए देश-विदेश के विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भोग लगाकर रोज सुबह पांच बजे और रात को नौ बजे आरती की जाती है। मंदिर में श्रद्धालु सुबह पांच से दोपहर 12 बजे तक और शाम चार से रात नौ बजे तक दर्शन कर सकते हैं। मंदिर में नवरात्र पर तीन वर्ष बाद मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेला सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में श्रद्धालुओं समेत बच्चे, युवा खरीदारी करते देखे गए।
मॉडल टाउन स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर के पुजारी पंडित नवल किशोर ने बताया कि बृहस्पतिवार को यजमानों ने पूजन कर मां के माल्यार्पण किया। प्रधान तरुण गांधी व अन्य पदाधिकारियों ने मां दुर्गा की आराधना व पाठ किया। भजन गायक सागर चुघ ने माता के भजनों का गुणगान किया।
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। बाघ पर सवार मां दुर्गा की तीसरी शक्ति देवी चंद्रघंटा है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी व संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है और स्वर में दिव्य, आलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है।