सनौली। यमुना बार्डर पर हरियाणा सीमा से लगे इलाके में यूपी की ओर से अनुमति लेकर तीन अलग-अलग जगहों पर चल रहा रेत खनन शनिवार से बंद हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मानसून के चलते तीन माह के लिए खनन बंद किया गया है। जुलाई, अगस्त, सितंबर में नदियां, नालों में रेत खनन पर पर रोक रहती है। खनन पर रोक 30 जून रात 12 बजे से लगा दी गई है। इससे सनौली यमुना बार्डर के आसपास तीन स्थानों ममोर, खुरगान, नंगला राई के पास बहती यमुना में खनन बंद हो गया है। यमुना के अंदर से रेत खनन कर रही जेसीबी, पोकलेन मशीनें बाहर निकाल ली गई हैं। इससे प्रदेश के किसानों ने राहत की सांस ली है। दो राज्यों हरियाणा-यूपी की सीमा में बहती यमुना के अंदर रेत खनन पर हरियाणा के गांव राणा माजरा, पत्थरगढ़, नवादा, तामसाबाद, सनौली, रिशपुर, नन्हेड़ा, मिर्जापुर, गोयला, खोजकीपुर, हथवाला आदि के किसानों ने यमुना के अंदर अधिक गहराई से रेत खनन से हरियाणा की ओर यमुना का रुख होने पर बाढ़ का खतरा जताया है। वहीं यूपी की ओर से खुरगान में ठेकेदार ने नवादा, तामसाबाद गांवों के किसानों की जमीन से ही रेत निकाल ली थी। इसका प्रमाण तीन महीने पहले रेत खनन की जगह की निशानदेही में सामने आया। इस पर ठेकेदार के खिलाफ सनौली थाने में रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। बापौली के नायब तहसीलदार कैलाश चंद्र ने कहा कि यमुना में यूपी की ओर से अनुमति लेकर रेत खनन करने वाले ठेकेदार ने हरियाणा के कुंडला, नवादा, तामसाबाद रकबे से किसानों की जमीन से रेत निकाल ली थी। मानसून सीजन में रेत खनन बंद किया गया है।