राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उत्तर भारत सहित देश के अन्य प्रांतों में केरल और चित्तौड़ के दो गांवों की शिक्षा और स्वरोजगार की पद्धति को लेकर जाएगा। यहां गांवों में जन जागरण अभियान चलाने के साथ लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करेंगे। इसके लिए 700 जिलों में रोजगार सृजन केंद्र स्थापित किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक में इस संबंध में विचार-विमर्श किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव केरल के इंरिजालक्कुडा जिले के तिरुवल्लपुर गांव में हुआ है। यहां स्वयंसेवकों ने 2025 तक गांव को पंचमुक्त करने की दिशा में काम किया है।
इसके तहत व्यसनमुक्त, ऋणमुक्त, रोगमुक्त, अपराधमुक्त और संघर्ष मुक्त गांव बनाया जा रहा है। इसके साथ चित्तौड़ प्रांत के झालवाड़ जिला के गुराडी व्यवसायी शाखा के स्वयंसेवक स्वावलंबन युक्त ग्राम की रचना कर रहे हैं। यहां प्रत्येक परिवार स्वरोजगार से जुड़ा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक में आत्मनिर्भर भारत बनाने पर मंथन किया गया। इसके लिए देश में 700 जिलों में रोजगार सृजन केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है। यहां 11 टीमों के 200 कार्यकर्ता संकल्प दिवस कार्यक्रम का आयोजन करेंगे।
गांव को व्यसनमुक्त बनाने में युवाओं ने की पहल
केरल में इरिंजालक्कुडा जिले का तिरुवल्लूर गांव के स्वयंसेवकों ने 2025 से पहले अपने गांव को पंचमुक्त यानी व्यसनमुक्त, ऋणमुक्त, रोगमुक्त, अपराध मुक्त, व संघर्षमुक्त करेंगे। इसमें आर्थिक रूप से स्वावलंबी, जैविक कृषि युक्त, शिक्षण युक्त, समरसता युक्त, और स्वावलंबन युक्त व आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास ग्राम विकास समिति के माध्यम से किए जा रहे हैं।
प्रत्येक परिवार रोजगार युक्त
गांव को पंचमुक्त बनाने के अलावा चित्तौड़ प्रांत के झालवाड़ जिला के गुराडी व्यवसायी शाखा के स्वयंसेवक स्वावलंबन युक्त ग्राम रचना कर रहे हैं। 25 सौ लोगों को व्यवसाय, शिक्षा, विवाह व भवन निर्माण के लिए न्यूनतम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया। इस गांव में 79 दुकानों का संचालन और तीन सौ गोशाला होने से प्रत्येक परिवार रोजगार युक्त हुआ है।