पानीपत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा दशहरा पर शस्त्र पूजन व पथ संचलन कार्यक्रम किया गया। आर्य पीजी कॉलेज के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में करीब एक हजार स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। मुख्य आकर्षण 10 से 15 सेवकों के साथ उनकी तीन पीढि़यां रहीं। इनमें दीवान चावल और विनेश ने अपने अनुभव साझा किए।
मुख्य वक्ता उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य प्रेम गोयल और मुख्य अतिथि न्यू इंश्योरेंस कंपनी से सेवानिवृत्त वरिष्ठ मंडल प्रबंधक राजेश कुमार मुख्य अतिथि रहे। जिला संघ चालक अनूप व नगर संघ चालक सतीश गुप्ता ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। आर्य कॉलेज में सुबह आठ बजे शुरू पथ संचलन सिविल अस्पताल कट से होकर पुराना बस स्टैंड, लाल बत्ती चौक और पालिका बाजार से होते हुए एसडी कॉलेज से आगे संजय चौक के साथ कट से यू टर्न लेते हुए वापस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, रेलवे रोड, लाल बत्ती चौक व पुराना बस स्टैंड से होते हुए आर्य कॉलेज में पहुंचा।
उत्तर क्षेत्र मुख्य कार्यकारिणी सदस्य प्रेम गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन की स्थापना 1925 में नागपुर में की गई थी। संघ 2025 में अपना शताब्दी वर्ष मनाएगा। इन 98 वर्षों में संघ ने समाज व देश को मजबूत किया है। इसकी बदौलत आज देश का नाम पूरे विश्व में गूंज रहा है। पहले देश सोने की चिड़िया कहलाई जाती थी। अब देश को सोने का शेर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। हर मंडल व गांव में कार्यकर्ता का होना जरूरी है। इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसको लेकर संघ ने बड़े स्तर पर योजना बनाई है। इस योजना के अनुरूप कार्यकर्ता लगातार काम कर रहे हैं और गांव में मंडल सत्र पर लोगों से संपर्क कर संघ का कुनबा बढ़ा रहे हैं।
जीटी रोड पर पथ संचलन करते-जाते स्वयंसेवकों का जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया गया। कई संगठनों ने इसको सराहनीय बताया। आर्य समाज पर कई संगठन इसको लेकर आगे आए। स्वयंसेवकों की लंबी लाइन आकर्षक लग रही थी। जीटी रोड पर इतना लंबा और बड़ा पथ संचलन पहली बार किया गया।
जिले समेत प्रदेश व राष्ट्र स्तर पर दशहरा के दिन शस्त्र पूजन और पथ संचलन किया जाता है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी शामिल होकर स्वयंसेवकों से रूबरू होते हैं।उन्हें संघ की नीतियों के बारे में विस्तार से बताते हैं। इसके साथ पथ संचलन में समाज को एकता और मजबूती का संदेश भी देते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मंगलवार को पथ संचलन ढोल व बाजे पर देशभक्ति धुन के साथ निकाला गया। सबसे आगे खुली गाड़ी थी। इसके पीछे टुकड़ियों में स्वयंसेवक थे। देशभक्ति गीतों के दोनों पर पथ संचलन किया गया। एक टुकड़ी में कई सदस्य मधुर धुन बजा रहे थे।