पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में अरुण मुनि ने बताया कि पैसे के साथ विनम्रता और सादगी न हो तो वह धन रुकता नहीं बह जाता है। केवल पूजा-पाठ, माला-जप पर्याप्त नहीं। आत्मा में रमण, आत्मा की खोज और दोषों का त्याग ही सच्चा धर्म है। हमें आत्मचिंतन जरूर करना चाहिए। यदि किसी को 24 घंटे में केवल पांच मिनट भी आत्मा में रमण मिल जाए तो समझो वह परम भाग्यशाली है। जीवन की घड़ियां व्यर्थ न जाएं, वीर को भजो, महावीर को साथी बनाओ। प्रवचन के समापन पर श्रावकों ने गुरु वंदना के माध्यम से अपनी भक्ति समर्पित की। वहीं, राजाखेड़ी गांव में श्रेयांश मुनि ने प्रवचन किए। मुनि ने कहा कि प्रतिक्रमण आत्मा की स्वच्छता का विज्ञान है। प्रतिक्रमण को केवल धार्मिक विधि नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और आत्म-शुद्धिकरण प्रक्रिया है। पुराने कर्मों की समीक्षा, दोषों की स्वीकृति, और निन्दामि की भावना यही प्रतिक्रमण का सार है। संवाद